फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५१२ फलदीपिका इत्यादि। इस मत को हम उतना मान्य नहीं मानते। क्योंकि जब एक चरण की महादशा १०० वर्ष की है तो आधा चरण बीत जाने से केवल ३ १/२ वर्ष भुक्त हुए बाकी ९६ १/२ वर्ष भोग्य हुए यह असंगत प्रतीत होता है। परन्तु फिर भी बहुत-से लोग इस मत को भी मानते हैं। (२) दूसरा मत जो हमारे विचार से अधिक मान्य है वह यह है कि एक चरण के १०० वर्ष हुए : आधा चरण बीत गया है। इस कारण १०० का आधा पचास वर्ष बीत गये। बाकी पचास वर्ष रहे। अब गिनिये, मेष के ७ वर्ष, वृषभ के १६ वर्ष, मिथुन के ९ वर्ष, और कर्क के २१ कुल ७+१६+९+२१=५३ वर्ष हुए। ५० बीत गये— इस कारण ७+१६+९+१८=५० वर्षों में से १८ वर्ष कर्क के बीते हैं। ३ वर्ष कर्क के बाकी हैं। इसलिये भोग्य दशा—जो जातक को भोगनी पड़ेगी वह होगी। कर्क भोग्य सिंह कन्या तुला वृश्चिक धनु ३ + ५ + ९ + १६ + ७ + १० = ५० वर्ष जब जातक ५० वर्ष का हो जावेगा तब कौन-सी दशा चलेगी ? देखिये रेवती प्रथम चरण के बाद रेवती द्वितीय चरण होता है। इस कारण ५० वर्ष के बाद रेवती के द्वितीय चरण की जो दशा बतायी गयी है—अर्थात् मकर के ४ वर्ष, उसके बाद कुंभ के ४ वर्ष, तब मीन के १० वर्ष, वृश्चिक के ७ वर्ष, यह दशायें आवेंगी। यदि रेवती के अन्तिम (चतुर्थ चरण) में जन्म होवे और उसमें भोग्य —मान लीजिये केवल ४० वर्ष हो, तो उसके बाद अश्विनी के प्रथम चरण में जो दशा दी गई है वे आवेंगी। पुस्तक के अन्त में चन्द्र स्पष्ट से भुक्त, भोग्य महादशा निकालने की सारणियां नं. १,२,३,४ दी जा रही हैं।