फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
पृष्ठ 525, कुल 684 में से
संदर्भ में पढ़ें५२४ फलदीपिका देह या जीवराशियों में स्थित ग्रहों के स्वभाव, गुण के अनुसार दशाफल सौम्य ग्रह शुभ फल करता है। क्रूर ग्रह या पापग्रह दुष्ट फल करता है । (१) सूर्य धननाश, आपत्ति, पीड़ा, ज्वर, शत्रुओं से भय, पद- च्युति (स्थान छूट जाना), पित्त के रोग, गुल्म, संग्रहणी, क्षय, कान के रोग, पशु या बन्धुओं का मरण, भाई बहिनों का नाश करता है । (२) चन्द्रमा अपने बन्धुओं से समागम, कन्या का जन्म, आरोग्य, (उत्तम स्वास्थ्य) भूषण, सुख, वस्त्र, राजा से सम्मान, दान, देवताओं का पूजन, ब्राह्मणों का सत्कार, पुण्य स्थानों की यात्रा (तीर्थ, मंदिरों की यात्रा) तीर्थ स्नान, उत्तम भोजन आदि शुभ फल करता है । (३) मंगल, ज्वर, बीमारी, अग्नि, भय, चोर भय अपने बन्धुओं से कलह, भाई बहिनों का नाश, खेती और खेत का नुकसान, लड़ाई-झगड़ा (युद्ध) पदच्युति, गुल्म, बवासीर, कुष्ठ, विष और शत्रु से बाधा करता है। ज्वर फुंसी-फोड़े, पित्तरोग, ग्रंथि स्फोट, विष से पीड़ा अग्नि भय, शस्त्र या चोर से हानि, राजा से भय—यह सब मंगल की दशा का फल है । (४) बुध अपने मित्रों और बन्धुओं से समागम, बड़े आदमियों की कृपा, विद्या और बुद्धि का प्रसार, अध्ययन, ज्ञान में वृद्धि, शास्त्र पठन, स्त्री, पुत्र तथा राजा से सुख, भूषण गौ, घोड़े, बकरी आदि का लाभ, विवेक, धन, बुद्धि और यश में विस्तार करता है । (५) बृहस्पति महत्व को बढ़ाता है । नाना प्रकार के सुख, राजा से अभिषेक (अर्थात् राज सम्मान) स्त्री, पुत्र, से सुख, इनकी प्राप्ति, धन-लाभ, सुख, भूषण, उत्तम भोजन, आरोग्य, यश, परोपकार आदि शुभ फल प्रदान करता है।