फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५४६ फलदीपिका इन राशियों में जब शनि गोचर वश आवेगा तब शुभ फल करेगा। बाकी राशियों में अर्थात् मेष, कर्क, तुला, मकर, मीन, इन राशियों में जब गोचर वश शनि आवेगा तो शुभ फल नहीं करेगा। इस कारण जैसे ऊपर सूर्य से विचार करके बताया गया है वैसे ही सातों ग्रहों से और लग्न से (कुल आठ से—इसीलिए इसे अष्टक वर्ग कहते हैं) यह देखना चाहिए कि कितने शुभ बिन्दु पड़े। यदि किसी स्थान पर ८ शुभ बिन्दु पड़ें, तो समझना चाहिए कि उस स्थान पर ग्रह गोचर वश पूर्ण शुभ फल देगा यदि किसी स्थान पर एक भी शुभ बिन्दु न पड़े तो वहाँ गोचर वश पूर्ण अशुभ फल समझना चाहिए। यदि किसी स्थान पर ४ शुभ बिन्दु हों तो यह समझना चाहिये कि ४ ग्रहों के विचार से तो वहाँ शुभ फल होगा और बाकी ४ के विचार से अशुभ फल। * ऊपर जो शनि का अष्टक वर्ग बनाया गया है उसमें सिंह राशि में ७ शुभ बिन्दु हैं। केवल शुक्र से वह राशि गोचर वश शनि के लिये शुभ स्थान नहीं बनती। जन्म कुंडली में (देखिये पृष्ठ ५३८) शुक्र वृश्चिक में है और शुक्र से केवल ६-११-१२ इन स्थानों में—शनि के अष्टक वर्ग में शुभ बिन्दु पड़ते हैं। (देखिये पृष्ठ ५४५)। सिंह, वृश्चिक से १०वाँ स्थान है इस कारण ऊपर जो शनि का अष्टक वर्ग बनाया गया है उसमें केवल ७ बिन्दु पड़े। क्योंकि यह सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शनि और लग्न से, शनि के गोचर के लिये शुभ स्थान है। ७ शुभ बिन्दु होने से काफ़ी अच्छा शुभ-फल गोचर वश होगा। जिस राशि में केवल एक शुभ बिन्दु पड़ा है वहाँ शनि गोचर वश काफ़ी अशुभ फल देगा। ४ शुभ बिन्दु जहाँ हों वहां मध्यम फल समझना चाहिये। चार से अधिक जितने शुभ बिन्दु पड़ें उतना ही अधिक शुभ और चार से जितने कम शुभ बिन्दु पड़ें ७ ग्रह और एक लग्न इस प्रकार कुल आठ हुए।