फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६०८ फलदीपिका है और अपने शत्रुओं को परास्त कर देता है। ऐसे जातक का पुत्र बहुत श्रेष्ठ (उत्तम) होता है। (vii) यदि गुलिक सातवें घर में हो तो जातक कलह करने वाला और लोक-द्वेषी होता है। ऐसा व्यक्ति थोड़ा समझने वाला, थोड़ा क्रोध करने वाला और कृतघ्न होता है। जातक की अनेक भार्यायें होती हैं ॥१२॥ (viii) यदि गुलिक अष्टम स्थान में हो तो जातक का शरीर छोटा होता है। चेहरे और नेत्रों में कोई विकलता की बात होती है। अर्थात् या तो कोई शारीरिक कमी हो या वाक् शक्ति में कुछ दोष हो। (ix) यदि नवें घर में गुलिक हो तो जातक अपने गुरु (गुरु, पिता आदि) तथा पुत्र से हीन होता है। (x) यदि दशम में गुलिक हो तो जातक शुभ कर्मों का परि- त्याग करता है और दानशील नहीं होता। (xi) यदि ग्यारहवें घर में गुलिक हो तो जातक सुखी, अति तेजस्वी और कान्तिवान् होता है। तथा उसे पुत्र सुख भी प्राप्त होता है ॥१३॥ (xii) यदि गुलिक बारहवें घर में हो तो जातक विषय युक्त से रहित, दीन और बहुत व्यय करने वाला होता है। अब एक दूसरा विषय प्रारम्भ करते हैं। जातक का जन्म लग्न या जन्म राशि वही होगी जो (१) गुलिक जिस राशि में है उससे त्रिकोण में हो या (२) जिस नवांश में मान्दि हो वह लग्न हो ॥१४॥ रवियुक्ते पितृहन्ता मातृक्लेशी निशापसंयुक्ते। भ्रातृवियोगः सकुजे बुधयुक्ते मन्दजे च सोन्मादी ॥१५॥