फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६१० फलदीपिका जिस दिन जातक का जन्म हुआ है उस दिन 'मुलिक' त्याज्यकाल* में पड़े तो ऐसा जातक चाहे राजघराने में भी पैदा हुआ हो किन्तु भीख मांगता है—अर्थात् दरिद्र होता है ॥१७॥ *“त्याज्ययुते” मूल संस्कृत श्लोक में यह शब्द आया है। इसकी परिभाषा किसी ने नहीं की है कि त्याज्य (काल) से क्या अभि- प्राय है :— हमारे विचार से निम्नलिखित त्याज्यकाल हैं। (क) विषघटी—यदि मान लिया जावे कि प्रत्येक नक्षत्र में ६० घड़ी होती हैं तो अश्विनी ५० घड़ी से ५४ घड़ी भरणी २४ ,, २८ ,, कृत्तिका ३० ,, ३४ ,, रोहिणी ४० ,, ४४ ,, मृगशिर १४ ,, १८ ,, आर्द्रा २१ ,, २५ ,, पुनर्वसु ३० ,, ३४ ,, पुष्य २० ,, २४ ,, आश्लेषा ३२ ,, ३६ ,, मघा ३० ,, ३४ ,, पूर्वा फाल्गुनी २० ,, २४ ,, उत्तरा फाल्गुनी १८ ,, २२ ,, हस्त २१ ,, २५ ,, चित्रा २० ,, २४ ,, स्वाती १४ ,, १८ ,, विशाखा १४ ,, १८ ,, अनुराधा १० ,, १४ ,, ज्येष्ठा १४ ,, १८ ,,