फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंछब्बीसवाँ अध्याय : गोचरफल ६२७ अनुभव हो। (८) रोग, भय उत्पन्न करे, मन में ताप (चिन्ता) कलह (लड़ाई, झगड़ा, विवाद), राजा या सरकार, अधिकारी वर्ग से भय, उनकी नाराज़गी का अन्देशा हो। (९) आपत्ति, दीनता, अपने प्रिय लोगों से विरह, जो उद्योग किये जावें उनमें असफलता। (१०) जिस कार्य की सिद्धि के लिये काम कर रहे हों उसमें सफलता—कोई बड़ा कार्य उठाया गया हो तो वह पूरा हो। (११) स्थान प्राप्ति, सम्मान वृद्धि, द्रव्य लाभ, रोग से छुटकारा, आर्थिक शारीरिक स्वास्थ्य। (१२) क्लेश, धन की बर्बादी, ज्वर आदि रोग, दोस्त दुश्मनी करें ॥ ११ ॥ आपद्धैन्यं तपसि विरहं चित्तचेष्टानिरोधं प्राप्नोत्युग्रां दशमगृहगे कर्मसिद्धिं दिनेशे । स्थानं मानं विभवमपि चैकादशे रोगनाशं क्लेशं वित्तक्षयमपि सुहृद्वैरमन्त्ये ज्वरं च ॥११॥ यह क्रम से बारहौं स्थानों में गोचरवश सूर्य का फल कहा गया है। प्रति वर्ष प्रायः निम्नलिखित तारीखों को सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है और प्रत्येक राशि में करीब एक महीना रहता है : सूर्य की राशि प्रवेश की अंग्रेज़ी तारीखें मेष प्रवेश १३ या १४ अप्रैल वृष " १४ या १५ मई मिथुन " १५ जून कर्क " १६ या १७ जुलाई सिंह " १६ या १७ अगस्त