भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 629, कुल 684 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 629

६२८ फलदीपिका कन्या प्रवेश १७ सितम्बर तुला " १७ अक्तूबर वृश्चिक " १५-१६ नवम्बर धनु " १६ दिसम्बर मकर " १३ या १४ जनवरी कुंभ " १२ फरवरी मीन " १४ मार्च ऊपर जो तारीखें बताई गई हैं वह स्थूल (मोटा-मोटी) सूर्य संक्रान्ति (सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण करता है— जाता है) की अंग्रेज़ी तारीखें हैं। कभी फरवरी के २८ दिन हो जाते हैं कभी २९ । इस कारण एकाध दिन का अन्तर पड़ जाता है— इससे अधिक नहीं । अब प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन की पिछली घटनाओं को विचार में लाकर यह देख सकता है कि उसके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ किस महीने (यहाँ महीना सूर्य प्रवेश राशि का गिनना चाहिये १५ ता० से १५ ता० तक, पहली तारीख से ३० या ३१ तारीख तक नहीं) में अधिक होती हैं । यह प्रत्यक्ष है कि जीवन के सब वर्ष एक से नहीं जाते—और सब महीने प्रति वर्ष एक से नहीं जाते क्योंकि सूर्य गोचर ही तो सब कुछ नहीं है— अन्य ग्रहों का भी गोचर होता है—महादशा, अन्तर्दशा भी अच्छी या ख़राब बदलती रहती है । सूर्य संक्रान्तिवश सूर्य गोचर विचार सूर्य गोचर विचार के सिलसिले में हम एक नई बात पाठकों के सामने रखते हैं । यह मन्त्रेश्वर ने नहीं लिखी है । अन्य स्थानों से ली गई हैं। (१) जिस दिन—जिस समय सूर्य संक्रान्ति हो अर्थात् सूर्य एक