फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंछब्बीसवाँ अध्याय : गोचरफल ६२९ राशि से दूसरी राशि में जावे शुद्ध पंचांग में यह देखिये कि जितने घंटे, मिनट पर (जितने बजे) या जितने घड़ी पल भर सूर्य पिछली राशि छोड़ कर आगे की राशि में प्रवेश कर रहे हैं—उस समय चन्द्रमा, किस नक्षत्र में है। जिस नक्षत्र में चन्द्रमा उस समय हो उस नक्षत्र से पहले वाला नक्षत्र एक कागज़ पर नोट कर लीजिये। उदाहरण के लिये जब सूर्य की संक्रान्ति हो रही है उस समय ज्येष्ठा नक्षत्र है तो ज्येष्ठा से पहला अनुराधा आप कागज़ पर नोट करें। यदि मान लीजिये सूर्य संक्रान्ति के समय चन्द्रमा पुष्य नक्षत्र में है तो पुष्य से पहला 'पुनर्वसु' नक्षत्र कागज़ पर नोट कीजिये। अब इस कागज़ पर नोट किये हुए नक्षत्र से गणना प्रारम्भ कीजिये और जन्म नक्षत्र तक—(जिस नक्षत्र में—जिस व्यक्ति का आप विचार कर रहे हैं—उसका जन्म के समय चन्द्रमा था) गिनिये। उदाहरण के लिये किसी व्यक्ति के जन्म के समय भरणी नक्षत्र था (अर्थात् उसके जन्म के समय चन्द्रमा भरणी नक्षत्र में था) और आपको यह विचार करना है कि इस मास में (सूर्य जिस राशि में एक मास रहेगा) सूर्य गोचर से कैसा फल करेगा तो उस सूर्य संक्रान्ति के समय चन्द्रमा मान लीजिये ज्येष्ठा में था तो आपने ज्येष्ठा से पहला नक्षत्र अनुराधा कागज़ पर नोट किया है तो अनुराधा से भरणी (जन्म नक्षत्र) तक गिनिये। अनुराधा १, ज्येष्ठा २, मूल, ३, पूर्वाषाढ़ ४, उत्तराषाढ़ ५, श्रवण ६, धनिष्ठा ७, शतभिषा ८, पूर्वाभाद्र ९, उत्तराभाद्र १०, रेवती ११, अश्विनी १२, भरणी १३, इस प्रकार १३ संख्या आई। इस संख्या के अनुसार उस मास में (१५ ता० से १५ तक) निम्नलिखित फल होगा। (क) यदि संख्या १, २, ३ इनमें से कोई हो तो—यात्रा, सफ़र या रास्ता चलना पड़े।