भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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६३० फलदीपिका। (ख) यदि संख्या ४, ५, ६, ७, ८, ९, इनमें से कोई हो तो भोग । (ग) यदि संख्या १०, ११, १२ इनमें से कोई हो तो 'व्यथा' अर्थात् कष्ट । (घ) यदि संख्या १३, १४, १५, १६, १७, १८ इनमें से कोई हो तो नवीन वस्त्र की प्राप्ति । (ङ) यदि संख्या १९, २०, २१ इनमें से कोई हो तो "हानि" । (च) यदि संख्या २२, २३, २४, २५, २६, २७ इनमें से कोई हो तो विपुल धन की प्राप्ति । क्रमेण भाग्योदयमर्थहानिं जयं भयं शोकमरोगतां च । सुखान्यनिष्टं गदमिष्टसिद्धिं मोदं व्ययं च प्रददाति चन्द्रः ॥१२॥ चन्द्र जन्मकालीन चन्द्र राशि से जब गोचर से चन्द्रमा विविध राशियों में आता है तो क्रमशः निम्नलिखित फल होते हैं :— (१) भाग्योदय (२) धनहानि (३) जय (४) भय (५) शोक (६) अरोगता (७) सुख (८) अनिष्ट फल (९) रोग (१०) इष्ट- सिद्धि—कार्य में सफलता (११) प्रसन्नता (१२) व्यय । जन्मकालीन चन्द्र राशि में हो तो भाग्योदय । द्वितीय में हो तो धनहानि, तृतीय में जय, जन्मकालीन चन्द्र राशि से चौथी राशि में गोचर से चन्द्र आये तब भय—इसी प्रकार सर्वत्र समझना चाहिये ॥ १२ ॥ अन्तः शोकं स्वजनविरहं रक्तपित्तोष्णरोगं लग्ने वित्ते भयमपि गिरां दोषमर्थक्षयं च ।