फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंछब्बीसवां अध्याय : गोचरफल ६६१ वर्ण स्वर मालूम करने का निम्नलिखित प्रकार है : वर्ण स्वरचक्र | क | छ | ड | ध | भ | व | इनका वर्ण स्वर 'अ' | | ख | ज | ढ | न | म | श | इनका वर्ण स्वर 'इ' | | ग | झ | त | प | य | ष | इनका वर्ण स्वर उ | | घ | ट | थ | फ | र | स | इनका वर्ण स्वर ए | | च | ठ | द | ब | ल | ह | इनका वर्ण स्वर ओ | यद्यपि (i) ब और व, (ii) श और स (iii) प और ख इनका वर्ण स्वर ऊपर के चक्र में अलग-अलग है लेकिन दोनों में से (जैसे ब और व) के एक का वर्ण स्वर विद्ध हो तो दूसरे का भी समझना चाहिये । ‘क’ से ‘ह’ तक ३३ व्यंजन होते हैं। यहाँ चक्र में व्यञ्जन सिर्फ ३० ही दिये गये हैं । ङ, ञ, ण नहीं दिये गये हैं क्योंकि प्रायः इन अक्षरों से कोई नाम शुरू नहीं होता । यदि ङ, ञ, ण, इनका वर्ण स्वर ज्ञात करना हो तो ङ का 'उ', ञ का 'इ', तथा ण का 'अ' वर्ण स्वर होता है । १२. (i) अब वेध का फल बताते हैं। ऊपर जन्म नक्षत्र, जन्म राशि, जन्म तिथि, नाम का प्रथम अक्षर, नाम के प्रथम अक्षर का वर्ण स्वर यह जो पांच बताये गये हैं उनमें (i) यदि एक का क्रूर वेध हो तो उद्वेग (चिन्ता, परेशानी) (ii) दो का क्रूर वेध हो तो भय (iii) तीन