फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७४ फलदीपिका त्रिकोण राशि किस अंश से किस अंश तक है इसके लिये देखिये सुगम ज्योतिष प्रवेशिका पृ. ३१) तो उसे ४५ षष्ट्यंश बल प्राप्त होता है। यदि स्वराशि में हो तो केवल ३० षष्ट्यंश बल मिलता है; यदि अधिमित्र राशि में हो तो २२.५ षष्ट्यंश; मित्र राशि में हो तो १५ षष्ट्यंश; सम राशि में हो तो ७.५ षष्ट्यंश, शत्रु राशि में ३.७५ षष्ट्यंश, और अधिशत्रु राशि में हो तो सबसे कम—केवल १.८७५ षष्ट्यंश बल प्राप्त होता है। (३) यदि कोई ग्रह स्वहोरा में हो तो ३० षष्ट्यंश, अधिमित्र होरा में हो तो २२.५ षष्ट्यंश; मित्र होरा में १५ षष्ट्यंश, सम होरा में ७.५ षष्ट्यंश शत्रु होरा में ३.७५ षष्ट्यंश और अधि शत्रु होरा में केवल १.८७५ षष्ट्यंश। (४) 'यदि कोई ग्रह स्वद्रेष्काण में हो तो ३० षष्ट्यंश, यदि अधि- मित्र द्रेष्काण में हो तो २२.५; मित्र द्रेष्काण में १५ सम द्रेष्काण में ७.५; शत्रु द्रेष्काण में ३.७५ और अधिशत्रु द्रेष्काण में १.८७५ षष्ट्यंश। (५) यदि कोई ग्रह अपने सप्तमांश में हो तो ३० षष्ट्यंश, अधि- मित्र सप्तमांश में २२.५; मित्र सप्तमांश में १५; सम सप्तमांश में ७.५; शत्रु सप्तमांश में ३.७५ और अधिशत्रु सप्तमांश में १.८७५ षष्ट्यंश। (६) यदि कोई ग्रह स्व नवांश में हो तो ३० षष्ट्यंश; अधिमित्र नवांश में हो तो २२.५; मित्र नवांश में १५; सम नवांश में ७.५; शत्रु- नवांश में ३.७५ और अधिशत्रु नवांश में केवल १.८७५ षष्ट्यंश। टिप्पणी—द्रव्य का परिमाण रुपये आने, पैसे, में व्यक्त किया जाता है। वस्तु का मन, सेर, छटांक में। षड्बल का परिमाण 'रूप' में व्यक्त किया जाता है। जिस तरह एक रुपये में १०० नये पैसे होते हैं वैसे ही एक रूप में ६० षष्ट्यंश होते हैं। यदि किसी ग्रह का बल पूरा-पूरा 'रूप' में व्यक्त नहीं किया जा सकता तो ... 'रूप'... 'षष्ट्यंश या केवल... 'षष्ट्यंश'—इस प्रकार किया जाता है।