भारतकोश
प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished86 पृष्ठ

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लिङ्गदेहादि-निरूपण स्थूलं निरूपितं प्रागधुना सूक्ष्मादितो ब्रूमः । अंगुष्ठमात्रः पुरुषः श्रुतिरिति यत्प्राह तत्सूक्ष्मम् ॥१११॥ स्थूल शरीरका तो पहले निरूपण हो चुका, अब सूक्ष्मादिका वर्णन करते हैं । जिसको श्रुतिने 'अंगुष्ठमात्र पुरुष' कहा है वही यह सूक्ष्म शरीर है । सूक्ष्माणि महाभूतान्यसवः पञ्चेन्द्रियाणि पञ्चैव । षोडशमन्तःकरणं तत्सङ्घातो हि लिङ्गतनुः ॥११२॥ पाँच सूक्ष्म महाभूत, पाँच प्राण, पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ और सोलहवाँ अन्तःकरण-इन तत्त्वोंके समूहका नाम ही 'सूक्ष्म शरीर' है । तत्कारणं स्मृतं यत्तस्यान्तर्वासनाजालम् । तस्य प्रवृत्तिहेतुर्बुद्ध्याश्रयमत्र तुर्यं स्यात् ॥११३॥ उस लिंगदेहके अन्दर जो वासनाओंका समूह है वही 'कारण-शरीर' कहलाता है । उसकी भी प्रवृत्तियोंके कारण और बुद्धिके आश्रयको 'तुर्य' ( महाकारण ) समझना चाहिये । तत्सारभूतबुद्धौ यत्प्रतिफलितं तु शुद्धचैतन्यम् । जीवः स उक्त आद्यैर्योऽहमिति स्फूर्तिकृद्वपुषि ॥११४॥ ३३ २