भारतकोश
प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished86 पृष्ठ

पृष्ठ 47, कुल 86 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 47

कर्तृत्व-भोक्तृत्व कर्तृत्व-भोक्तृत्व यद्वत्सूर्येऽभ्युदिते स्वव्यवहारं जनः कुरुते । तं न करोति विवस्वान्न कारयति तद्वदात्मापि॥१३३॥ सूर्यके उदय होनेपर जैसे मनुष्य ही अपने-अपने कार्योंको करते हैं, सूर्य कुछ भी नहीं करता-कराता, वैसे ही आत्मा भी न कुछ करता है, न कराता है । लोहे हुतभुग्व्याप्ते लोहान्तरताड्यमानेऽपि । तस्यान्तर्गतवह्नेः किं स्यान्निर्घातजं दुःखम् ॥१३४॥ अग्निसे व्याप्त हुए लोहेको दूसरे लोहेसे पीटनेपर क्या उसके भीतर स्थित अग्निको भी कोई चोट लगती है ? निष्ठुरकुठारघातैः काष्ठे सञ्छिद्यमानेऽपि । अन्तर्वर्ती वह्निः किं घातैश्छिद्यते तद्वत् ॥१३५॥ कठोर कुठारसे काठको काटनेपर क्या उसके घात-प्रतिघातसे काष्ठके भीतर रहनेवाला अग्नि भी कट जाता है ? तनुसम्बन्धाज्जातैः सुखदुःखैर्लिप्यते नात्मा । ब्रूते श्रुतिरपि भूयोऽनश्नन्नन्योऽभिचाकशीत्यादि।१३६। इसी प्रकार शरीर-सम्बन्धसे प्राप्त हुए सुख-दुःखोंसे आत्मा लिप्त नहीं होता । इस विषयमें श्रुति भी बारंबार कहती ३९

प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित) · पृष्ठ 47, कुल 86 में से · BharatKosha