प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)
Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)
पृष्ठ 56, कुल 86 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रबोधसुधाकर द्विधाभक्ति चित्ते सत्त्वोत्पत्तौ तडिदिव बोधोदयो भवति । तर्ह्येव स स्थिरः स्याद्यदि चित्तं शुद्धिमुपयाति ॥१६६॥ चित्तमें सत्त्वगुण उत्पन्न होनेपर ज्ञानका बिजलीके समान उदय तो हो जाता है, परन्तु वह स्थिर तभी रहता है जब चित्त शुद्ध हो जाता है । शुद्धयति हि नान्तरात्मा कृष्णपदाम्भोजभक्तिमृते । वसनमिव क्षारोदैर्भक्त्या प्रक्षाल्यते चेतः ॥१६७॥ किन्तु अन्तःकरण भगवान् श्रीकृष्णचन्द्रके चरणकमलोंकी भक्तिके बिना कभी शुद्ध नहीं हो सकता । जैसे वस्त्रको खारयुक्त जलसे शुद्ध किया जाता है, उसी प्रकार चित्तको भक्तिसे निर्मल किया जा सकता है । यद्वत्समलादर्शो सुचिरं भस्मादिना शुद्धे । प्रतिफलति वक्त्रमुच्चैः शुद्धे चित्ते तथा ज्ञानम्॥१६८॥ जिस प्रकार राख आदिसे चिरकालतक मार्जन करनेसे मलिन दर्पणके स्वच्छ हो जानेपर उसमें मुखका प्रतिबिम्ब स्पष्ट पड़ने लगता है उसी प्रकार शुद्ध चित्तमें ज्ञानका आविर्भाव हो जाता है । ४८