भारतकोश
प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished86 पृष्ठ

पृष्ठ 59, कुल 86 में से

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द्विधाभक्ति प्रमितयदृच्छालाभे सन्तुष्टिर्दारपुत्रादौ । ममताशून्यत्वमतो निरहङ्कारत्वमक्रोधः ॥१७८॥ मृदुभाषिता प्रसादो निजनिन्दायां स्तुतौ समता । सुखदुःखशीतलोष्णद्वन्द्वसहिष्णुत्वमापदो न भयम् ॥ निद्राहारविहारेष्वनादरः सङ्गराहित्यम् । वचने चानवकाशः कृष्णस्मरणेन शाश्वती शान्तिः ॥ केनापि गीयमाने हरिगीते वेणुनादे वा । आनन्दाविर्भावो युगपत्स्यादृष्टसात्त्विकोद्रेकः॥ [ उस सूक्ष्म-भक्तिके लक्षण ये हैं— ] स्मृति और पुराणोंके सद्वाक्योंसे सुनी हुई भगवान्‌की मूर्तिके मानस-पूजनका अभ्यास, एकान्त-सेवनमें तत्पर रहना, सत्य, समस्त प्राणियोंमें श्रीकृष्णचन्द्र- को वर्तमान जानना और सम्पूर्ण प्राणियोंसे अद्रोह । इन साधनोंसे समस्त प्राणियोंपर दया उत्पन्न हो जाती है । इनके सिवा प्रारब्धा- नुकूल स्वल्प लाभमें सन्तोष रखना, स्त्री और पुत्र आदिमें ममता- शून्य होना, अहङ्कार और क्रोधसे रहित होना, मृदु भाषण करना, प्रसन्न-चित्त रहना, अपनी निन्दा और स्तुतिमें समान रहना, सुख- दुःख और शीतोष्णादि द्वन्द्वोंको सहन करना, आपत्तिसे भय न करना, निद्रा, आहार और विहारादिमें अनादर, अनासक्त रहना, व्यर्थ वार्तालापके लिये अवकाश न देना, श्रीकृष्ण-स्मरणसे ५१

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