भारतकोश
प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished86 पृष्ठ

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प्रबोधसुधाकर मन्दारपुष्पवासितमन्दानिलसेवितं परानन्दम् । मन्दाकिनीयुतपदं नमत महानन्ददं महापुरुषम् ॥ १८९ ॥ जो कल्पवृक्षके पुष्पोंकी गन्धसे युक्त मन्द-मन्द वायुसे सेवित हैं, परमानन्दस्वरूप हैं तथा जिनके चरण-कमलोंमें श्रीगंगाजी विराजमान हैं उन महानन्ददायक महापुरुषको नमस्कार करो । सुरभीकृतदिग्वलयं सुरभिशतैरावृतं सदा परितः । सुरभीतिक्षपणमहासुरभीमं यादवं नमत ॥ १९० ॥ जिन्होंने समस्त दिशाओंको सुगन्धित कर रक्खा है, जो चारों ओरसे सैकड़ों कामधेनु गौओंसे घिरे हुए हैं तथा देवताओंके भयको दूर करनेवाले और बड़े-बड़े राक्षसोंके लिये भयङ्कर हैं उन यदुनन्दनको नमस्कार करो । कन्दर्पकोटिसुभगं वाञ्छितफलदं दयार्णवं कृष्णम् । त्यक्त्वा कमन्यविषयं नेत्रयुगं द्रष्टुमुत्सहते ॥ १९१ ॥ जो करोड़ों कामदेवोंसे भी सुन्दर है, वाञ्छित फलके देने- वाले हैं, दयाके समुद्र हैं, उन श्रीकृष्णचन्द्रको छोड़कर ये नेत्र- युगल और किस विषयको देखनेके लिये उत्सुक होते हैं। पुण्यतमामतिसुरसां मनोऽभिरामां हरेः कथां त्यक्त्वा । श्रोतुं श्रवणद्वन्द्वं ग्राम्यकथामादरं वहति ॥ १९२॥ ५४