प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)
Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)
पृष्ठ 74, कुल 86 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रबोधसुधाकर वास्तवमें विचार किया जाय तो गुड़ और उसकी मधुरताके अभेदके समान यह नाशवान् मनुष्य-शरीर भी परमात्मारूप ही प्रतीत होगा। किं पुनरनन्तशक्तेर्लीलावपुरीश्वरस्येह । कर्माण्यलौकिकानि स्वमायया विदधतो नृहरेः॥२२५॥ फिर अपनी मायासे अलौकिक कर्म करनेवाले अनन्तशक्ति ईश्वर नृहरिके लीलामय शरीरकी तो बात ही क्या है ? मृद्भक्षणेन कुपितां विकसितवदनां स्वमातरं वक्त्रे । विश्वमदर्शयदखिलं किं पुनरथ विश्वरूपोऽसौ ॥२२६॥ मिट्टी खानेपर कुपित होकर माता यशोदाने जब मुँह खोला तो जिन्होंने उस (मुख) में ही सारा ब्रह्माण्ड दिखा दिया, वे ही यदि स्वयं विश्वरूप हो गये तो क्या आश्चर्य है ? अनुग्रह विषविषमस्तनयुगलं पाययितुं पूतना गृहं प्राप्ता । तस्याः पृथुभाग्याया आसीत्कृष्णार्पणो देहः ॥२२७॥ देखो, पूतना स्तनोंमें विषम विष लगाकर उन्हें पिलानेके लिये घरमें आयी थी, किन्तु उस बड़भागिनीका शरीर श्रीकृष्णके अर्पण हो गया ! ६४