भारतकोश
प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished86 पृष्ठ

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प्रबोधसुधाकर बड़े भारी अजगर-रूप अघासुरको, जो गौवों, गोपों और गोपियोंको अपने पेटमें डालकर अति पीड़ा पहुँचा रहा था, मारकर भगवान्ने अनघ (निष्पाप) कर दिया । पीत्वारण्यहुताशनमसह्यतत्तेजसो हेतोः । दग्धान्मुग्धानखिलाञ्जुगोप गोपान्कृपासिन्धुः ॥२३२॥ जो अपने तेजके कारण अति असह्य था, वनमें लगे हुए उस दावानलको पीकर उसके कारण दग्ध और मुग्ध हुए समस्त गोपोंकी कृपासागर भगवान्ने रक्षा की । पातुं गोकुलमाकुलमशनितडिद्वर्षणैः कृष्णः । असहाय एकहस्ते गोवर्धनमुद्धधारोच्चैः ॥२३३॥ वज्र, बिजली और वर्षासे व्याकुल गोकुलकी रक्षा करनेके लिये कृष्णचन्द्रने बिना किसीकी सहायताके ही एक हाथपर गोवर्धन-पर्वतको उठा लिया । वासोलोभाकलितं धावद्रजकं शिलातलैर्हत्वा । विस्मृत्य तदपराधं वैकुण्ठवासोऽर्पितस्तस्मै ॥२३४॥ वस्त्रोंके लोभसे भागते हुए धोबीको पत्थरोंसे मारकर भगवान्ने उसके अपराधको भूलकर उसे वैकुण्ठ-वास दिया । त्रेधा वक्रशरीरामतिलम्बोष्ठीं स्खलद्द्रुपूर्वचनाम् । स्रक्चन्दनपरितोषात्कुब्जामृज्वाननामकरोत् ॥२३५॥ ६६