भारतकोश
प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished86 पृष्ठ

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अनुग्रह तीन ओरसे टेढ़े शरीरवाली और अति लंबे-लंबे होठों- वाली कुब्जाको जिसके शरीर और वाणी प्रेमवश कम्पायमान हो रहे थे, केवल माला और चन्दनसे ही सन्तुष्ट होकर, सुन्दरी सुमुखी बना दिया । निहतः पपात हरिणा हरिचरणाग्रेण कुवलयापीडः । तुङ्गोन्मत्तमतङ्गः पतङ्गवद्दीपकस्याग्रे ॥२३६॥ बड़ा ऊँचा और मदोन्मत्त कुवलयापीड हाथी भगवान् हरिके चरणकी ठोकरसे मारा जाकर इस प्रकार गिरा जैसे दीपकके सामने पतङ्ग गिरता है। युद्धमिषात्सह रङ्गे श्रीरङ्गेनाङ्गसङ्गमं प्राप्य । मुष्टिकचाणूराख्यौ ययतुर्निःश्रेयसं सपदि ॥२३७॥ युद्धके मिषसे ही रङ्गभूमिमें श्रीरमानाथका अङ्ग-सङ्ग पाकर मुष्टिक और चाणूर नामके पहलवान तुरन्त मोक्षपदको प्राप्त हो गये। देहकृतादपराधाद्वैकुण्ठोत्कण्ठितान्तरात्मानम् । यदुवरकुलावतंसः कंसं विध्वंसयामास ॥२३८॥ अपने देहकृत अपराधोंसे ही वैकुण्ठ-प्राप्तिकी उत्कण्ठावाले कंसको यदुकुलभूषण कृष्णचन्द्रने नष्ट कर दिया । हरिसन्दर्शनयोगात्पृथुरणतीर्थे निमज्जते तस्मै । भगवान्नु प्रदद्याद्यः सद्यश्रैद्याय सायुज्यम् ॥२३९॥ ६७