भारतकोश
प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished86 पृष्ठ

पृष्ठ 78, कुल 86 में से

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पृष्ठ 78

प्रबोधसुधाकर हरिके दर्शनका सुयोग मिल जानेसे अति महान् युद्ध-तीर्थमें डूब जानेवाले उस चेदिराज शिशुपालको भगवान्ने तुरन्त सायुज्य- मुक्ति दे दी। मीनादिभिरवतारैर्निहताः सुरविद्विषो बहवः । नीतास्ते निजरूपंतत्र च मोक्षस्य का वार्ता ॥२४०॥ मत्स्यादि अवतारोंमें भगवान्ने जिन-जिन अनेकों देव- द्रोहियोंको मारा उन सभीको अपना ही रूप दे दिया, मोक्षकी तो बात ही क्या है ? ये यदुनन्दननिहतास्ते तु न भूयः पुनर्भवं प्रापुः । तस्मादवताराणामन्तर्यामी प्रवर्तकः कृष्णः ॥२४१॥ यदुनन्दनने जिन-जिनका वध किया उनको तो फिर पुनर्जन्मकी प्राप्ति हुई नहीं; अतः समस्त अवतारोंके प्रवर्तक अन्तर्यामी श्रीकृष्णचन्द्र ही हैं। ब्रह्माण्डानि बहूनि पङ्कजभवान्प्रत्यण्डमत्यद्भुता- न्गोपान्वत्सयुतानदर्शयदजं विष्णूनशेषांश्च यः । शम्भुर्यच्चरणोदकं स्वशिरसा धत्ते च मूर्तित्रया- त्कृष्णो वै पृथगस्ति कोऽप्यविकृतः सच्चिन्मयो नीलिमा जिन्होंने ब्रह्माजीको अनेक ब्रह्माण्ड, प्रत्येक ब्रह्माण्डमें जुदे- जुदे अति अद्भुत ब्रह्मा, वत्सोंके सहित समस्त गोपों तथा [भिन्न- भिन्न ब्रह्माण्डोंके] समस्त विष्णु दिखाये; और जिनके चरणोदकको ६८