प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)
Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary
मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा
DevanagariHindipublished278 पृष्ठ
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८० प्रासादमण्डने त्रिखंडा की रेखा और कला—
| नम्बर | चार के नाम | रेखा का नाम | प्रथम खंडकी कला | द्वितीय खंडकी कला | तृतीय खंडकी कला | कला की कुल संख्या |
|---|---|---|---|---|---|---|
| १ | समचार<br>८×१=८ | शशिनी | ८ | ८ | ८ | २४ |
| २ | सपादचार<br>८×१।=१० | शीतला | ८ | ९ | १० | २७ |
| ३ | सार्धचार<br>८×१॥=१२ | सौम्या | ८ | १० | १२ | ३० |
| ४ | पादोनद्वयचार<br>८×१।॥=१४ | शान्ता | ८ | ११ | १४ | ३३ |
| ५ | द्विगुणचार<br>८×२=१६ | मनोरमा | ८ | १२ | १६ | ३६ |
| ६ | सपाद द्विगुणचार<br>८×२।=१८ | शुभा | ८ | १३ | १८ | ३९ |
| ७ | सार्धद्विगुणचार<br>८×२॥=२० | मनोभवा | ८ | १४ | २० | ४२ |
| ८ | पादोनत्रयचार<br>८×२।॥=२२ | वीरा | ८ | १५ | २२ | ४५ |
| ९ | त्रिगुणचार<br>८×३=२४ | कुमुदा | ८ | १६ | २४ | ४८ |
| १० | सपाद त्रिगुणचार<br>८×३।=२६ | पद्मशेखरा | ८ | १७ | २६ | ५१ |
| ११ | सार्द्धं त्रिगुणचार<br>८×३॥=२८ | ललिता | ८ | १८ | २८ | ५४ |
| १२ | पादोन चतुष्क<br>८×३।॥=३० | लीलावती | ८ | १९ | ३० | ५७ |
| १३ | चतुर्गुणचार<br>८×४=३२ | त्रिदशा | ८ | २० | ३२ | ६० |
| १४ | सपाद चतुष्कचार<br>८×४।=३४ | पूर्णमण्डला | ८ | २१ | ३४ | ६३ |
| १५ | सार्धचतुष्कचार<br>८×४॥=३६ | पूर्णभद्रा | ८ | २२ | ३६ | ६६ |
| १६ | पादोन पंचकचार<br>८×४।॥=३८ | भद्राङ्गी | ८ | २३ | ३८ | ६९ |
| इस प्रकार चतुःखंडादिकी कला रेखाएं चार के भेदों से समझना चाहिये । |