भारतकोश
प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

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८० प्रासादमण्डने त्रिखंडा की रेखा और कला—

नम्बरचार के नामरेखा का नामप्रथम खंडकी कलाद्वितीय खंडकी कलातृतीय खंडकी कलाकला की कुल संख्या
समचार<br>८×१=८शशिनी२४
सपादचार<br>८×१।=१०शीतला१०२७
सार्धचार<br>८×१॥=१२सौम्या१०१२३०
पादोनद्वयचार<br>८×१।॥=१४शान्ता१११४३३
द्विगुणचार<br>८×२=१६मनोरमा१२१६३६
सपाद द्विगुणचार<br>८×२।=१८शुभा१३१८३९
सार्धद्विगुणचार<br>८×२॥=२०मनोभवा१४२०४२
पादोनत्रयचार<br>८×२।॥=२२वीरा१५२२४५
त्रिगुणचार<br>८×३=२४कुमुदा१६२४४८
१०सपाद त्रिगुणचार<br>८×३।=२६पद्मशेखरा१७२६५१
११सार्द्धं त्रिगुणचार<br>८×३॥=२८ललिता१८२८५४
१२पादोन चतुष्क<br>८×३।॥=३०लीलावती१९३०५७
१३चतुर्गुणचार<br>८×४=३२त्रिदशा२०३२६०
१४सपाद चतुष्कचार<br>८×४।=३४पूर्णमण्डला२१३४६३
१५सार्धचतुष्कचार<br>८×४॥=३६पूर्णभद्रा२२३६६६
१६पादोन पंचकचार<br>८×४।॥=३८भद्राङ्गी२३३८६९
इस प्रकार चतुःखंडादिकी कला रेखाएं चार के भेदों से समझना चाहिये ।