प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)
Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary
मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंषष्ठोऽध्यायः १०७ अष्टविभागीय तलमान— क्षेत्रेऽष्टांशैर्विभक्ते तु कर्णौ भागद्वयं भवेत् । भद्रार्धं कर्णतुल्यं तु भागेनैकेन निर्गमः ॥६॥ समचोरस प्रासाद के तलका आठ भाग करें, उनमे से दो भाग का कोना और दो भाग का भद्रार्ध बनावें। इन अंगों का निर्गम एक २ भाग का रक्खे ॥६॥ दश और बारह विभागीय तलमान-- दशांशे सार्धभागं च भद्रार्धं च प्रतिरथः । कर्णौ द्विभागः सूर्यांशे भद्रार्धं च प्रतिरथः ॥७॥ समचोरस तलका दस भाग करें। उनमे से दो भाग का कोना, डेढ़ भाग का प्रतिरथ और डेढ़ भाग का भद्रार्ध बनावे। यदि बारह भाग करना हो तो दो भाग का कर्ण, दो भाग का प्रतिकर्ण और दो भाग का भद्रार्ध बनावे ॥७॥ चौदह विभागीय तलमान— चतुर्दशविभक्ते तु कर्णाद्यं द्वादशांशवत् । भद्रपार्श्वद्वये कार्या भागभागेन नन्दिका ॥८॥ समचोरस तलका चौदह भाग करे । उनमे से कर्ण आदिका मान बारह विभागीय तलमान के अनुसार रक्खें । अर्थात् कर्ण दो भाग, प्रतिकर्ण दो भाग, और भद्रार्ध दो भाग, ऐसे बारह भाग और भद्र के दोनों तरफ एक २ भाग की नन्दिका ( कोणी ) बनावे । ऐसे कुल चौदह भाग होते है ॥८॥ सोलह विभागीय तलमान— षोडशांशे प्रकर्त्तव्या कर्णप्रतिरथान्तरे । कोशिका भागतुल्या च शेषं चतुर्दशांशवत् ॥६॥ समचोरस तलका सोलह भाग करे । उनमे से कर्ण और प्रतिरथ के बीचमे एक २ भाग की कोशिका बनावें । बाकी सब अंगो का मान चौदह विभागीय तलमान के बराबर समझे । अर्थात् कर्ण दो भाग, कोणी एक भाग, प्रतिरथ दो भाग, नंदी एक भाग और भद्रार्ध दो भाग, इस प्रकार सोलह विभागीय तलमान होता है ॥६॥