भारतकोश
प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

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१२४ प्रासादमण्डने मुखभद्रयुतो वापि द्वित्रिप्रतिरथैर्युतः । कर्णोदकान्तरेणाथ भद्रोदकविभूषितः ॥१७॥ आठ प्रकार के गूढ मंडपों की भी दीवार प्रासाद के दीवार जैसी बनावें अर्थात् प्रासाद की दीवार जितने थरवाली हों उतने थरवाली और रूपों की आकृति वाली हो तो रूपों की आकृति वाली गूढ मंडप की दीवार बनानी चाहिये । वे समचोरस, सुभद्र और प्रतिरथ वाला, मुखभद्र और दो या तीन प्रतिरथ वाला, कर्ण जलान्तर वाला अथवा भद्र जलान्तर वाला, ऐसे आठ प्रकार के गूढ मंडप है ॥१६-१७॥