प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)
Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary
मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसप्तमोऽध्यायः १२७ अपराजितपृच्छा सूत्र १८७ मे विशेषरूप से कहा है कि— गूढमंडप के आगे एक चौकी वाला सुभद्र १, तीन चौकी वाला किरीटीर, तीन चौकी के आगे एक चौकी, ऐसा चार चौकी वाला दुंदुभी ३, तीन २ चौकी की दो लाईन, ऐसा छह चौकी वाला प्रान्त ४, छह चौकी के आगे एक चौकी ऐसा सात चौकी वाला मनोहर कामद ५, [रेखाचित्र विवरण:] १. सुभद्र १ २. किरीट २ — ३ पद, ८ स्तंभ ३. दुन्दुभि ३ — ५ पद, १० स्तंभ (३२ स्वीर्क मण्डप) ४. प्रान्त ४ — ६ पद, १२ स्तंभ ५. मनोहर ५ — ७ पद, १४ स्तंभ ६. शांत ६ — ९ पद, १६ स्तंभ ७. नंद ७ — १० पद, १८ स्तंभ (कुंभोद्भव मण्डप) [१२ चौकी मण्डप:] ८. सुदर्शन ८ — २४ पद, २० स्तंभ ९. रूपक ९ — २२ पद, २२ स्तंभ १०. सुनाभ १० — २४ पद, २४ स्तंभ ११. सिंह ११ — २५ पद, २६ स्तंभ १२. सूर्योत्थक १२ — २८ पद, २८ स्तंभ