प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)
Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary
मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२६ . प्रासादमण्डन. गूमट का उदय विस्तार से आधे मानका रक्खें, यह वामन नाम का उदय कहा जाता है यह सब यज्ञों के फल को देने वाला है और शान्तिदायक है। उदय का नव भाग कर, उन में से दो भाग कम करके सात भाग का उदय रक्खें, उसको अनन्त नाम का उदय कहते हैं, यह सब लोगों के लिये सुख कारक है। नव भाग मे से तीन भाग कम करके छह भाग का उदय रक्खें उसको वाराह नाम का उदय कहते हैं। यह अनन्त फल को देने वाला है। गूमट का न्यूनाधिक उदय फल-- "उदयाश्च समाख्याता अनन्त फलदायकाः । तत्र देशे भवेच्छान्ति-रारोग्यं च प्रजायते ॥ उदये हीनाश्च ये केचित् क्रियन्ते मण्डपा भुवि । तत्र मारी महाव्याधी राष्ट्रभङ्गभयं भवेत् ॥ दुर्भिक्षं चातिरीद्रं च राजा च म्रियते तथा । धनं निष्फलतां याति शिल्पिनो म्रियन्ते ध्रुवम् !!" इति ज्ञानरत्नकोशे । उदय का जो मान बतलाया है, उसी मान के अनुसार कार्य करने से वह अनन्त फल को देने वाला, देश में शान्ति करने वाला और आरोग्यता को बढ़ाने वाला है। यदि ये मंडप कहे हुए उदय के मान से हीन करें तो देश में महामारी, अनेक प्रकार की व्याधियां, देश भंग का भय, भयंकर दुर्भिक्ष, राजा को मृत्यु, धनकी निष्फलता और शिल्पियों की मृत्यु, इत्यादि उपद्रव होने का भय है। बारह चौको मंडप-- एकत्रिवेदपट्सप्ता-ङ्कचतुष्कयस्त्रिकत्रये । अग्रे भद्रं विना पार्श्वे पार्श्वयोरग्रतस्तथा ॥२२॥ अग्रतस्त्रिचतुष्कयश्च तथा पार्श्वद्वयेऽपि च । मुक्तकोणं चतुष्के चेदिति द्वादश मण्डपाः ॥२३॥ गूढमंडप के आगे एक, तीन, चार, छह, सात और नव चौकी वाले, ये छह प्रकार के मंडप हुए, उनमें छट्ठा नव चौकी वाले मंडप के आगे एक चौकी हो ७, अथवा आगे चौकी न हो परन्तु दोनों बगल मे एक एक चौकी हो ८, तथा दोनों बगल मे और आगे एक एक चौकी हो ९, अथवा आगे तीन चौकी हो, अर्थात तीन तीन चौकी वाली चार लाईन हो १०, इसके दोनों बगल में एक २ चौकी हो ११ अथवा दोनों बगल में और आगे एक ३ चौकी हो १२, ऐसे बारह प्रकार के चौकी मंडप हैं॥२२-२३॥