भारतकोश
प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

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पृष्ठ 187

१४० प्रासादमण्डने प्रथम संवरणा की समचोरस भूमिका आठ भाग करें, उसमें चार भाग संवरणा का उदय रखें। सब संवरणा विस्तार से आधी उदय में रखें। कर्ण के ऊपर मूल घंटा दो भाग विस्तार वाली और एक भाग का उदयवाली बनावें एवं कूटा भी विस्तार से आधा उदय मे रखें । [.....................................................। द्याद्योद्भास्तदर्थे च कर्णो कर्णो च घण्टिका ॥ १८ वीं शताब्दि से वर्तमान आवृति सवरणी शैली चित्र सं० ३८२ और गुजराती. १८ वी शताब्दि से आधुनिक समय की सवरणा शैली ।