भारतकोश
प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

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१५२ प्रासादमण्डने प्रतिष्ठा के नक्षत्र— प्रतिष्ठा चोत्तरा मूल आर्द्रायां च पुनर्वसौ । पुष्ये हस्ते मृगे स्वातौ रोहिण्यां श्रुतिमैत्रभे ॥३८॥ तीन उत्तरा नक्षत्र, मूल, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, मृगशीर्ष, स्वाति, रोहिणी, श्रवण और अनुराधा, ये नक्षत्र देव प्रतिष्ठा के कार्य मे शुभ हैं ॥३८॥ प्रतिष्ठा में वर्जनीय तिथि— तिथिरिक्तां कुजं धिष्ण्यं क्रूरविद्धं विधुं तथा । दग्धातिथिं च गण्डान्तं चरभोपग्रहं त्यजेत् ॥३६॥ रिक्तातिथि, मंगलवार, क्रूरग्रह से वेधित अथवा युत नक्षत्र और चंद्रमा, दग्धातिथि, नक्षत्र, मास, तिथि और लग्न आदिका गंडांतयोग, चर राशि और उपग्रह ये सब प्रतिष्ठा कार्य मे वर्जनीय हैं ॥३६॥ सुदिने शुभनक्षत्रे लग्ने सौम्ययुतेक्षिते । अभिषेकः प्रतिष्ठा च प्रवेशादिकमिष्यते ॥४०॥ शुभदिनमे, शुभ