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प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

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परिशिष्टे केसरीप्रासादः १८१ २१-ऐरावतप्रासाद — रेखोर्ध्वे च ततः शृङ्गं कर्त्तव्यं सर्वकामदम् । ऐरावतस्तदा नाम शक्रादिसुरवल्लभः ॥५५॥ इत्यैरावतप्रासादः ॥२१॥ इसका तलमान और स्वरूप मुकुटोज्ज्वल प्रासाद के अनुसार जाने । विशेष यह है कि— कोणो के ऊपर का तिलक हटाकर के उस जगह शृग रक्खे । यह सब इच्छित फल देनेवाला है । ऐसा ऐरावतप्रासाद इन्द्रादि देवों के लिये प्रिय है ॥५५॥ शृंग सख्या— कोणो १२, नंदी पर ८, प्रत्यंग ८, प्ररथे २४, नंदीपर ८, भद्रनन्दी पर ८, भद्रे १६, एक शिखर, कुल ८५ शृंग । तिलक संख्या—कर्णानन्दी पर ८, प्रति नन्दी पर ८, कुल १६ तिलक । २२-राजहंसप्रासाद— तथैव तिलकं कुर्याद् भद्रकर्णौ तु शृङ्गकम् । राजहंसः समाख्यातः कर्त्तव्यो ब्रह्ममन्दिरे ॥५६॥ इति राजहंसप्रासादः ॥२२॥ इसका तलमान और स्वरूप ऐरावत प्रसाद के अनुसार जाने । विशेष यह है कि— कोणो के ऊपर तीसरा शृंग के बदले मे एक तिलक चढ़ावें, अर्थात् दो शृंग और एक तिलक चढ़ावे । तथा भद्रनंदी के ऊपर एक शृंग बढावे । ऐसा राजहंस प्रासाद का स्वरूप है, वह ब्रह्मा के लिये बनावे ॥५३॥ शृंग सख्या—कोणो ८ प्रत्यंग ८, कर्ण नन्दी पर ८, प्ररथे २४, प्ररथ नंदी के ऊपर ८, भद्रनन्दी के ऊपर १६, भद्रे १६ और एक शिखर, कुल ८६ शृंग। तिलक सख्या—कोणो ४, कर्णनंदी पर ८. प्ररथनदी पर ८, एवं कुल २० तिलक । २३-पक्षिराज (गरुड) प्रासाद— रेखोर्ध्वं च ततः शृङ्गं कर्त्तव्यं सर्वकामदम् । पक्षिराजस्तदा नाम कर्त्तव्यः स श्रियः पतेः ॥५७॥ इति पक्षिराजप्रासाद ॥२३॥ इस प्रासाद का मान और स्वरूप राजहंस प्रासाद के अनुसार जाने । विशेष यह कि— कोणो के ऊपर का तिलक हटा कर के उसके बदले शृग चढावे । ऐसा पक्षिराज प्रासाद विष्णु के लिये बनाना चाहिये ।५७॥ शृंगसंख्या—कोणो १२, प्रत्यंग ८, कर्णनंदी पर ८, प्ररथे २४, प्ररथनन्दी पर ८, भद्रनदी पर १६, भद्रे १६ और एक शिखर, एव कुल ९३ शृंग । तिलक संख्या कर्णनन्दी पर ८ और प्ररथ नन्दी पर ८, एव कुल १६ तिलक ।

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