भारतकोश
प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

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२०० प्रासादमण्डने धर्मनाथ प्रासाद के प्ररथ के ऊपर तिलक के बदले में एक एक शृंग चढ़ाने से धर्मवृक्ष नाम का प्रासाद होता है ॥६८॥ शृंग संख्या—कोणे ५६.प्ररथे १२०, कोणी पर १६, नंदी पर १६, भद्रे १६, प्रत्यंग ८, एक शिखर, कुल २३३ और तिलक ४ कोणे । विभक्ति सोलहवीं । ३१-शान्तिजिन अथवा श्रीलिंग प्रासाद— चतुरस्रीकृते क्षेत्रे द्वादशांशविभाजिते । कर्णे भागद्वयं कार्यः प्रतिकर्णस्तथैव च ॥७९॥ भद्रार्धे सार्धभागेन नन्दिका चार्धभागिका । कर्णे क्रमद्वयं कार्यं प्रतिकर्णे तथैव च ॥८०॥ नन्दिकायां शृङ्गकूट-मुरुशृङ्गाणि द्वादश । शान्तिनामश्च विज्ञेयः सर्वदेवेभ्यः कारयेत् ॥८१॥ श्रीलिङ्गं च तदा नाम श्रीपतिषु सुखावहः । इति शान्तिवल्लभः श्रीलिङ्गप्रासादः ॥३१॥ प्रासाद की समचोरस भूमिका बारह भाग करें । उनमें दो भाग का कोण, दो भाग का प्रतिकर्ण, डेढ भाग का भद्रार्ध और आधे भाग की भद्रनंदी करें । कोण और प्रतिकर्ण के ऊपर दो दो क्रम, भद्रनंदी के ऊपर एक शृंग और एक कूट, चारों भद्रों के ऊपर बारह उरु- शृंग चढावें । ऐसा शांति नामका प्रासाद जानें, यह सब देवों के लिये बनावें । इसका दूसरा नाम श्रीलिङ्ग प्रासाद है, वह विष्णु के लिये सुखदायक है ॥७९ से ८१॥ शृंगसंख्या—कोणे ५६, प्ररथे ११२ भद्रनंदी पर ८, भद्रे १२, एक शिखर, कुल १८९ शृंग और ८ कूट नंदो पर । ३२-कामदायक प्रासाद— उरुशृङ्गं पुनर्द्यात् प्रासादः कामदायकः ॥८२॥ इति कामदायकः ॥३२॥ शांतिनाथ प्रासाद के भद्र के ऊपर एक उरुशृंग अधिक चढ़ाने से कामदायक प्रासाद होता है ॥८२॥ शृंग संख्या—भद्रे १६ बाकी पूर्ववत कुल—१९३ शृंग ।