भारतकोश
प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

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( २२२ ) योगिनी स्त्री चौसठ देवी, योनि स्त्री. मंडल विशेष । र रंगभूमि स्त्री. गर्भगृह के सामने पांचवां नीचा मंडप, नृत्य मंडप । रजत न. चांदी, धातु विशेष । रत्नकूट पु. केसरी जाति का सोलहवां प्रासाद । रत्नगर्भा स्त्री. पंद्रहवी संवरणा । रत्नशीर्ष पु. वैराज्यादि ११वां प्रासाद । रत्नसम्भवा स्त्री २४वी संवरणा । रथ पु. विशेष प्रकार की गाडी, कोने के समीप का दूसरा कोना, फालना विशेष । रथा स्त्री. प्रासाद की जाती विशेष । रथिका स्त्री. भद्र का गवाक्ष, आला । रन्ध्र न. प्रवेश द्वार । रम्या स्त्री. छठ्ठी संवरणा । रवि पु. बारह की संख्या, सूर्य । रश्मि पु. किरण । रस पु. छह की संख्या । राक्षस पु. आय से व्यय अधिक जानने की संज्ञा । राजगृह न. राजमहल । राजपुर न. राजधानी का शहर, राजनगर । राजमन्दिर न. राजमहल । राजमार्ग पु. सार्वजनिक आम रास्ता । राजसेन न. मण्डप की पीठ के ऊपर का थर । राजहंस पु. केशरी जाति का २२ वां प्रासाद । राजांश पु. क्षेत्रफल का नाप विशेष । राम पु. तीन की सख्या (राम, परशुराम और बलराम) रासभ पुं. खर आय का नाम । राहुमुख न. शेषनागचक्र का मुख । रिक्ता स्त्री नींव की चौथी शिला, ४, ६ और १४ तिथि । रीति स्त्री. पीत्तल, धातु विशेष । रुचक पुं. समचोरस स्तंभ । रुद्र पुं. ग्यारह की संख्या, वास्तुदेव । रुद्रदास पु. वास्तुदेव, रूपकण्ठ पुं. गुम्बद के उदय में कर्णदर्दोरिका के ऊप का थर. रूपस्तंभ पुं. द्वारशाखा के मध्य का स्तंभ. रेखा स्त्री. खांचा, कोना । रोग पुं. वास्तुदेव । रोहिणी स्त्री. चौथा नक्षत्र । रौप्यज न. चांदी का बना हुआ । ल लक्ष्मीनारायण पुं. विष्णुदेव । लक्ष्य त. उद्देश्य, चिह्न । लतालिगोद्भव न. मंडल विशेष । लतिन पुं. प्रासाद की एक जाति । लतिना स्त्री. प्रासाद की एक जाति । लय न. मकान, गृह । लाटी स्त्री. स्त्रीयुगलवाली प्रासाद की जंघा । लिङ्गोद्भव न. वास्तु मंडल विशेष । लोह पुं. धातु विशेष, लोहा । व वक्त्र न. मुख । वज्र न. हीरा । वज्रक पु. केसरी जाति का १६ वां प्रासाद । वज्री स्त्री. ओषधि विशेष, गडूची । वट पुं. वृक्ष विशेष, बरगद, वड़, वत्स पु. आकाशीय कल्पित एक संज्ञा । वपुष् न. शरीर । वराटका स्त्री. प्रासाद की एक जाति । वराल पुं. ग्रास, जलचर जीव विशेष, मगर । वरुण पुं. पश्चिम दिशा का दिक्पाल, वास्तुदेव । वर्द्धमान पुं. प्रतिकर्णवाला स्तंभ । वलभी स्त्री प्रासाद की एक जाति । वल्कल पुं. औषधि विशेष । वसु पुं. आठ की संख्या, आठ देव विशेष । वह्नि पुं. अग्निकोण का दिक्पाल, अग्नि, वास्तुदेव, चित्रक ओषधि । वह्निभ न. कृत्तिका नक्षत्र ।