प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)
Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary
मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २२३ ) वाजिन् पुं. अश्वथर, घोडा का थर । वानरेश्वर पुं. हनुमान देव । वापी स्त्री. वावडी । वामन न. मंडप के व्यास के आधे मान के उदयवाला गूम्बद, प्रथम का देव, जगती के आगे का बलाणक मंडप । वायव्य पु. वायुकोना । वायस पुं. ध्वाक्ष आय, कौआ । वाराह पुं. मंडप के व्यासार्ध के ३/२ मान के उदयवाला गुम्बद । खरशिला का देव । वारि न. पानी, जल । वारिमार्ग न. दीवार से बाहर नोकला हुआ खाचा । वारुण न. शतभिषा नक्षत्र, वासव न. धनिष्ठा नक्षत्र । वास्तु पुं. न. निवास स्थान, गुहाप्रसाद में विशेष प्रकार की देवपूजन विधि । वाहन न. सवारी, गाडी । विघ्नेश पुं. गणपति, गणेश । विजयानन्द पुं. वैराज्यादि २२वा प्रासाद । वितथ पुं. वास्तु मंडल के देव । विदारिका स्त्री वास्तुमण्डल के अग्नि कोने की देवी । विद्याधर पुं. गूम्बद में नृत्य करने वाले देवरूप । केवाल घर का देव । विधि पुं. वास्तुमण्डल के देव, ब्रह्मा । विधु पु. चन्द्रमा, एक सख्या । विद्ध वि. वेध, रुकावट । विपर्यास पुं. विपरीत, उलटा । विभव पुं. सातवा व्यय । विमान पुं. वैराज्यादि सातवा प्रासाद, राजद्वार के आगे का बलाणक मण्डप । विमानजा स्त्री. प्रासाद की एक जाति । विमाननागरच्छन्दा स्त्री. प्रासाद की एक जाति । विमानपुष्पका स्त्री. प्रासाद की एक जाति । विलोक्य पुं. खुला भाग । विवस्वन् पु. वास्तुमण्डल का देव, सूर्य । विंशति स. बीस की सख्या । विशाल पुं. वैराज्यादि आठवा प्रासाद । विश्व न. जगत्, तेरह की संख्या । विश्वकर्मन् पु. जगत की रचना करने वाला देव- शिल्पी । विष्णुक्रांता स्त्री. औषधि विशेष अपराजिता विस्तीर्णा वि. विस्तार वीतराग पुं. रागरहित जिनदेव । वृत्त वि. गोलाई । वृद्धि वि. बढाना । वृष पुं. पाचवी आय, नदीगण, वृषभ । वृषभध्वज पुं. केसरी जाति का २४वा प्रासाद । वेद पुं. चार की सख्या । वेदिका स्त्री. पीठ, प्रासाद आदिका आसन । वेदी स्त्री. राजसेन के ऊपर का थर, पीठ । वेश्मन् न. मंदिर, घर । वैडूर्य पु. केसरीजाति का १७ वा प्रासाद, रत्न विशेष । वैधृति पुं. सत्तावीस योग मे से एक योग । वैराज्य पु. प्रासाद की एक जाति । वैराटी स्त्री. प्रासाद की कमलपत्र वाली दीवार । वैष्णव पु. श्रवण नक्षत्र । व्यक्त वि. प्रकाशवाला । व्यङ्ग वि. टेढा । व्यजन न' पखा । व्यतिक्रम वि. मर्यादा से अधिक । व्यतिपात पुं. सत्तावीस योग मे से एक योग । व्यय पु. आठ की सख्या, खर्च । व्यास पुं. विस्तार, गोल का समान्तर दो भाग करने वाली रेखा । व्योमन् न. शून्य, आकाश । व्रीही स्त्री जब, धान्य विशेष । श शक्र पु. चौदह की सख्या, इन्द्र । शङ्कर पु ईशानकोन, महादेव । शङ्कु पु. छाया मापक यंत्र । शङ्खावर्त्त पुं. प्रासाद की देहली के आगे की अद्ध'चंद्र के आकारवाली शंख मोर लताभो वाली आकृति ।