भारतकोश
प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

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प्रथमोऽध्यायः ६ राशि, योनि, नाड़ी, गण आदि जानने का शतपद्‌चक्र—

संख्यानक्षत्रअक्षरराशिवर्णवश्ययोनिराशीशगणनाडीचन्द्रव्यय
अश्विनिचू. चे.<br>चो. ला.मेषक्षत्रियचतुष्पदअश्वमंगलदेवआद्यउत्तरशान्त
भरणीली. लू.<br>ले. लो.मेषक्षत्रियचतुष्पदगजमंगलमनुष्यमध्यउत्तरपीर
कृत्तिकाअ. इ.<br>उ. ए.१ मेष<br>२ वृष१ क्षत्रिय<br>३ वैश्यचतुष्पदबकरा१ मंगल<br>३ शुक्रराक्षसअन्त्यपूर्वप्रद्योत
रोहिणीओ. वा.<br>वी. वु.वृषवैश्यचतुष्पदसर्पशुक्रमनुष्यअन्त्यपूर्वश्रियानंद
मृगशिरवे. वो.<br>का. की.२ वृष<br>२ मिथुन२ वैश्य<br>२ शूद्र२ चतुष्पद<br>२ मनुष्यसर्प२ शुक्र<br>२ बुधदेवमध्यपूर्वमनोहर
आर्द्राकु. घ.<br>ङ. छ.मिथुनशूद्रमनुष्यश्वानबुधमनुष्यआद्यपूर्वश्रीवत्स
पुनर्वसुके. को.<br>हा. ही.३ मिथुन<br>१ कर्क३ शूद्र<br>१ ब्राह्मण३ मनुष्य<br>१ जलचरमार्जार३ बुध<br>१ चन्द्रदेवआद्यपूर्वविभव
पुष्यहू. हे.<br>हो. डा.कर्कब्राह्मणजलचरबकराचन्द्रमादेवमध्यपूर्वचिन्तात्म
आश्लेषाडी. डू.<br>डे. डो.कर्कब्राह्मणजलचरमार्जारचन्द्रमाराक्षसअन्त्यपूर्वशान्त
१०मघामा. मी.<br>मु. मे.सिंहक्षत्रियवनचरचूहासूर्यराक्षसअन्त्यदक्षिणपीर
११पूर्वा फा०मो. टा<br>टी. टू.सिंहक्षत्रियवनचरचूहासूर्यमनुष्यमध्यदक्षिणप्रद्योत
१२उत्तरा फा.टे. टो.<br>पा. पी.१ सिंह<br>३ कन्या१ क्षत्रिय<br>३ वैश्य१ वनचर<br>३ मनुष्यगो१ सूर्य<br>३ बुधमनुष्यआद्यदक्षिणश्रियानन्द
१३हस्तपु. षा.<br>ण. ठ.कन्यावैश्यमनुष्यभैंसबुधदेवआद्यदक्षिणमनोहर