भारतकोश
प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

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१० प्रासादमण्डने

संख्यानक्षत्रअक्षरराशिवर्णवश्ययोनिराशीशगणनाडीचन्द्रव्यय
१४चित्रापे. पो<br>रा. री.२ कन्या<br>२ तुला२ वैश्य<br>२ शूद्रमनुष्यवाघ२ बुध<br>२ शुक्रराक्षसमध्यदक्षिणश्रीवत्स
१५स्वातिरु. रे.<br>रो. ता.तुलाशूद्रमनुष्यभैंसशुक्रदेवअंत्यदक्षिणविभव
१६विशाखाती. तु.<br>ते. तो.३ तुला<br>१ वृश्चिक३ शूद्र<br>१ ब्राह्मण३ मनुष्य<br>१ कीडाव्याघ्र३ शुक्र<br>१ मंगलराक्षसअंत्यदक्षिणचिन्तात्मा
१७अनुराधाना. नी.<br>नु. ने.वृश्चिकब्राह्मणकीडाहीरणमंगलदेवमध्यपश्चिमशान्त
१८ज्येष्ठानो या.<br>यी. यु.वृश्चिकब्राह्मणकीडाहीरणमंगलराक्षसआद्यपश्चिमपौर
१९मूलये. यो.<br>भा. भी.धनक्षत्रियमनुष्यकुक्कुरगुरुराक्षसआद्यपश्चिमप्रद्योत
२०पूर्वाषाढाभु. धा.<br>फ. ढा.धनक्षत्रियमनुष्य<br>चतुष्पदवानरगुरुमनुष्यमध्यपश्चिमश्रियानन्द
२१उत्तराषाढाभे. भो.<br>जा. जी.१ धन<br>३ मकर१ क्षत्रिय<br>३ वैश्यचतुष्पदन्योला१ गुरु<br>३ शनिमनुष्यअंत्यपश्चिममनोहर
२२श्रवणखी. खू.<br>खे खो.मकरवैश्यचतुष्पद<br>जलचरवानरशनिदेवअंत्यपश्चिमश्रीवत्स
२३धनिष्ठागा. गी.<br>गु गे.२ मकर<br>२ कुम्भ२ वैश्य<br>२ शूद्र२ जलचर<br>२ मनुष्यसिंहशनिराक्षसमध्यउत्तरविभव
२४शतभिषागो. सा.<br>सी. सुकुम्भशूद्रमनुष्यघोडाशनिराक्षसआद्यउत्तरचिन्तात्मा
२५पूर्वा भाद्रसे. सो.<br>दा. दी३ कुम्भ<br>१ मीने३ शूद्र<br>१ ब्राह्मण३ मनुष्य<br>१ जलचरसिंह३ शनि<br>१ गुरुमनुष्यआद्यउत्तरशान्त
२६उत्तराभाद्रदु. थ.<br>झ. ञ.मीनब्राह्मणजलचरगौगुरुमनुष्यमध्यउत्तरपौर
२७रेवतीदे. दो.<br>चा ची.मीनब्राह्मणजलचरहाथीगुरुदेवअंत्यउत्तरप्रद्योत
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