भारतकोश
प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

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पृष्ठ 56

प्रथमोऽध्याय १६ शिला का जो समचोरस मान आवे, उसके तीसरे भाग का पिंड (मोटाई) रक्खे। पिंड के आधे भाग मे शिला के ऊपर रूपो बनावे। तथा पुष्पकी आकृति बनावे। ज्ञान प्रकाश दीपार्णव के मत से धरणी शिला का मान— “एकहस्ते तु प्रासादे शिला वेदाङ्गुला भवेत् । षडंगुला द्विहस्ते तु त्रिहस्ते ग्रहसंख्यया ॥ द्वादशाङ्गुलं शिलामानं प्रासादे चतुर्हस्तके। तृतीयांशोदयः कार्यो हस्ताद्याद् वेदहस्तकम् ॥ चतुर्हस्तादितः कृत्वा यावद् द्वादशहस्तकम् । पादोनाङ्गुला च वृद्धि-र्हस्ते हस्ते च दापयेत् ॥ सूर्यहस्तादितः कृत्वा यावच्च जिनहस्तकम् । अर्धाङ्गुला भवेद् वृद्धि-रुच्छ्रये तु नवाङ्गुल। ॥ चतुर्विंशादितः कृत्वा यावत् षट्त्रिंशहस्तकम् । पादोनाङ्गुला च वृद्धिः पिण्डं च द्वादशाङ्गुलम् ॥ षट्त्रिंशादितश्च कृत्वा यावत् पञ्चाशद्धस्तकम् । एकाङ्गुला भवेद् वृद्धिः पिण्डं च द्वादशाङ्गुलम् ॥” ग्र० ११ एक हाथ के प्रासाद मे शिला का मान चार अंगुल, दो हाथ मे छः अंगुल, तीन हाथ मे नव अंगुल और चार हाथ के प्रासाद मे बारह अंगुल शिला का मान है। एक से चार हाथ तक के प्रासाद मे शिला का जो मान आवे, उसके तीसरे भाग शिला की मोटाई रक्खे। पाच से बारह हाथ तक के प्रासाद मे प्रत्येक हाथ पौन २ अंगुल बढ़ाकर के, तेरह से चोबीस हाथ तक के प्रासाद मे प्रत्येक हाथ आधा २ अंगुल बढ़ा करके बनावे। पाच से चौबीस हाथ तक के प्रासाद मे शिला का जो मान आवे उसकी मोटाई नव अंगुल की रक्खे । पचीस से छत्तीस हाथ तक पौन २


[चित्रगत विवरण / यन्त्र-मण्डल]:

  • बाह्य आयुध/प्रतीक:
    • ऊपर: ध्वजा, गदा, त्रिशूल
    • दाएँ: वज्र, शक्ति
    • नीचे: दंड, तलवार
    • बाएँ: नागपाश
  • आन्तरिक नवकोष्ठक (३×३) मण्डल:
    • प्रथम पंक्ति: कुम्भ, सर्प, शंख
    • द्वितीय पंक्ति: सिंह, कूर्म, तरङ्ग
    • तृतीय पंक्ति: मकर, मण्डूक, मत्स्य