प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)
Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary
मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५ २४ अंगुल का एक मध्यम हाथ और छह यवोदर का एक अंगुल, ऐसे २४ अगुल का एक कनिष्ठ हाथ माना जाता है । इन तीन प्रकार के हाथो मे से—गाव, नगर, वन, बगीचा, किला, कोस, योजन आदिका नाप ज्येष्ठ मान के हाथ से, १प्रासाद (राजमहल और देव मंदिर), प्रतिमा, लिंग, जगतीपीठ मडप और सब प्रकार के मनुष्यो के घर ये सब मध्यम मान के हाथ से और सिंहासन, शय्या, बर्त्तन, छत्र, शस्त्र और सब प्रकार के वाहन आदि का नाप कनिष्ठमान के हाथ से नापने का विधान है । २हाथ की बनावट— हाथ मे तीन तीन अगुल की एक २ पर्व रेखा माना है, उसके स्थान पर एक २ पुष्प की आकृति किया जाता है । ऐसे आठ पर्व रेखा होती है । चौथी पर्व रेखा हाथ का मध्य भाग समझा जाता है, इस मध्य भाग से आगे पाचवी अगुल का दो भाग, आठवी अगुल का तीन भाग और बारहवी अगुल का चार भाग किया जाता है । हाथ के प्रत्येक अगुल के कापा का एक २ देव है, जिसे २४ अगुल के २३ कापा होते हैं, इनके देवो के नाम राजवल्लभमडन अ० १ श्लो० ३६ मे लिखा है । परन्तु पर्व रेखा के पुष्प का आठ और एक आदि ऐसे नव देव मुख्य माने है । जैसे— 'रुद्रो वायुर्विश्वकर्मा हुताशो, ब्रह्मा कालस्तोयप सोमविष्णू ।' अर्थात् हाथ के आद्य भाग का देव रुद्र, प्रथम पुष्प का देव वायु, दूसरे पुष्प का देव विश्वकर्मा, तीसरे पुष्प का देव अग्नि, चौथे पुष्प का देव ब्रह्मा, पाचवें पुष्प का देव यम, छठ्ठे पुष्प का देव वरुण, सातवें पुष्प का देव सोम और आठवे पुष्प का देव विष्णु है । इन नव देवो मे से कोई भी देव हाथ उठाते समय शिल्पी के हाथ से दब जाय तो अशुभ फलदायक माना है । इसलिये शिल्पीयो को हाथ के दो फूलो के बीच से उठना चाहिये । इसका फल समरागण सूत्रधार मे लिखा है कि— “ हाथ (गज) को रुद्र और वायु देव के मध्य भाग से उठावें तो धन की प्राप्ति और कार्य की सिद्धि होवे । वायु और विश्वकर्मा देव के मध्य भाग से उठावें तो इच्छित फल की प्राप्ति होवे । विश्वकर्मा और अग्निदेव के मध्य भाग से उठावें तो काम अच्छी तरह पूर्ण होवे । अग्नि और ब्रह्मा देव के मध्य भाग से उठावें तो पुत्र की प्राप्ति और कार्य की सिद्धि होवे । ब्रह्मा और यमदेव के मध्य भाग से उठावें तो शिल्पी की हानि होवे । यम और वरुण देव के मध्य भाग से उठावें तो मध्यम फलदायक जानना । वरुण और सोमदेव के मध्य भाग से उठावें तो मध्यम फल जानना । सोम और विष्णु देव के मध्य भाग से उठावे तो अनेक प्रकार की सुख समृद्धि होवे । १ समरागण सूत्रधार ग्रंथ मे ज्येष्ठ हाथ से नापने का लीखा है । २ देखो राजवल्लभमडन अध्याय १ श्लोक ३३ से ३६ तक ।