भारतकोश
प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

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२४ प्रासादमण्डने फलनाओं का सामान्य मान— फालना कर्णतुल्या स्याद् भद्रं तु द्विगुणं मतम् । सामान्योऽयं विधिस्तुल्यो हस्ताङगुलविनिर्गमः ॥४२॥ इति श्री सूत्रधारमण्डनविरचिते प्रासादमण्डने वास्तुशास्त्रे मिश्रलक्षणो नाम प्रथमोऽध्यायः ॥१॥ सब फालनायें कोने के मान के बराबर रखनी चाहिये और भद्र कोने से दुगुना रखना चाहिये, ऐसा सामान्य नियम है। ये सब फालनाये प्रासाद का जितने हाथ का बिस्तार हो उतने अंगुल निकलती रखनी चाहिये ॥४२॥ इति श्रीपंडित भगवानदास जैन द्वारा अनुवादित प्रासादमण्डन के मिश्र- लक्षण नाम के प्रथमाध्याय की सुबोधिनी नाम की भाषाटीका समाप्त ॥१॥

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