प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)
Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary
मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३८ प्रासादमण्डने गणेश आयतन— गणेशस्य गृहे तद्वच्चण्डी शम्भुर्हरी रविः । मूर्त्तयो द्वादशान्येऽपि गणाः स्थाप्या हिताश्च ये ॥४२॥ इति गणेशायतनम् । गणेश के पंचायतन देवों मे—मध्य में गणेश, उसके पीछे प्रदक्षिण क्रम से चंडीदेवी, महादेव, विष्णु और सूर्य की स्थापना करे । तथा बारह गणों की मूर्त्तियां भी स्थापित करना हित कारक है ॥४२॥ विष्णु आयतन— विष्णोः प्रदक्षिणेनैव गणेशार्काम्बिकाशिवाः । गोप्यस्तस्यावतारस्य मूर्त्तयो द्वारिकां तथा ॥४३॥ इति विष्ण्वायतनम् । विष्णु के पंचायतन देवों मे—मध्य मे विष्णु को स्थापित करके उसके प्रदक्षिण क्रमसे गणेश, सूर्य, अम्बिका और शिव को स्थापित करे । तथा गोपियों की और अवतारों की मूर्त्तियां तथा द्वारिका नगरी को स्थापित करे ॥४३॥ चण्डी आयतन— चण्ड्याः शम्भुर्गणेशोऽर्को विष्णुः स्थाप्यः प्रदक्षिणे । मातरो मूर्त्तयो देव्या योगिन्यो भैरवादयः ॥४४॥ इति चण्डिकायतनम् । चंडी देवी के पंचायतन देवो में—मध्य मे चंडी देवी की स्थापना करके, उसके प्रदक्षिण क्रम से महादेव, गणेश, सूर्य और विष्णु को स्थापित करें । तथा मातृदेवी, चौसठ योगिनी आदि देवियो की और भैरव आदि देवो की भी मूर्त्तियां स्थापित करें ॥४४॥ शिव पञ्चायतन— शम्भोः सूर्यो गणेशश्च चण्डी विष्णुः प्रदक्षिणे । स्थाप्याः सर्वे शिवस्थाने दृष्टिवेधविवर्जिताः ॥४५॥ इति शिवायतनम् । शिव के पञ्चायतन देवों में-मध्य मे शिव को स्थापित करके, उसके प्रदक्षिण क्रम से सूर्य, गणेश, चण्डी और विष्णु को स्थापित करें । परंतु उनका दृष्टिवेध अवश्य छोड़ देवें ॥४५॥