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प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

( ६२५ ) सिंहशाखा स्त्री. द्वार की नववी शाखा सिंहस्थान न. शुकनास । सिंहार्क पु सिंह राशिका सूर्य । सिंहावलोकना स्त्री. प्रासाद की एक जाति । सितशृंग पु. वैराज्यादि १२वा प्रासाद । सिद्धाश्रम पु सिद्ध पुष्पो का निर्वाणस्थान । सीसक न. सीसा, धातुविशेष । सुग्रीव पु वास्तुमडल का देव । सुनोल न अच्छा नीलम रत्न । सुप्रभा स्त्री दो शाखावाला द्वार का नाम । सुभगा स्त्री. तीन शाखावाला द्वार । सुर पु अन्तराल थर का देव । मुरवेश्मन् न. देवालय, देव मंदिर । सुवर्ण न. सोना, धातु विशेष । सुपिर न. छेद, पोलापन । सूत्रधार पु शिल्पी, मंदिर और मकान आदि बनाने वाला कारीगर । सूत्रारम्भ पु नीव खोदने के प्रारंभ मे प्रथम वास्तुभूमि मे कीले ठोककर उसमे सूत्र बाधने का आरंभ । सूर्य पु. बारह की सख्या, वास्तुदेव, द्वारशाखा के देव । सृष्टि स्त्री. दाहिनी ओर से गिनना, उत्पत्ति पृ वी । सोपान न. सीडी । सोम पु. वास्तुमडल का देव । सौध पु राजमहल, हवेली । सौभाग्यिनी स्त्री. आठवी शिला का नाम । सौम्य पु शुभग्रह, बुध । सौम्या स्त्री. उत्तर दिशा । स्कन्दा स्त्री. वास्तुमडल के नैऋत्य कोन की देवी । स्कन्ध पु शिखर के ऊपर का भाग स्तम्भ पु थंभा, खभा, ध्वजादंड स्तम्भवेध पु ध्वजाधार, कलावा । स्तात्र न स्तुति । स्थ'ण्डल न. प्रतिष्ठा मडल मे बालु (रेती) की वेदी। जिसके ऊपर देव को स्नान कराया जाता है । स्थावर न. प्रासाद के थर, शनिवार । स्थूल वि. मोटा । स्नानोदक न स्नान जल, चरणामृत । स्मरकीर्त्ति स्त्री. एक शाखा वाला द्वार । स्वयम्भू पु बिना घडित शिवलिग । स्वर्ण न. सोना । स्वस्तिक न. वास्तुमडल विशेष । स्वाति स्त्री. पद्रहवा नक्षत्र । ह हरि पु कणिका का देव, विष्णु हर्म

? Look at १७-२३ vs १८-२३: १७-२३, १८-२३, २०-१६, २१-२३, Wait, in line L4: १७-१३, १८-२३, Wait, look at the first pair: १७-१३, wait, look at '१' in १७-१३: it has a straight vertical, looks like १. But wait, why would lines be 17 to 13? It would be 17-something. Line numbers in pages: 17 to 23 (१७-२३)! Wait, is that a misprint in the book itself? Yes, the book printed '१७-१३' or '१७-२३'? It looks like '१७-१३'. We transcribe what is printed.

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Let's review

( २२७ ) पृष्ठ लाईन अशुद्ध शुद्ध पृष्ठ लाईन शुद्ध शुद्ध १७५ २३ चतुष्टद्यंशको चतुपटद्यशको २०८ ६ तत्प्रभाण तत्प्रमाण १७६ ४ उरुशृङ्ग उरुशृङ्गं ,, २२ षड्विशपद षड्विंशपद ,, ८ इन्दनील इन्द्रनील ,, २४ वेदहप वेदरूप १७७ ३ 'रखलें' के बाद छूटा ओर कोने के २११ ३ पद्ममम् पद्मम् हुआ मेटर— ऊपर से एक ,, १४ पुरमध्यें पुरमध्ये शृंग हटा ,, २५ धुरे पुरे करके उसके २१४ २४ कङ्ग कङ्ग बदले तिलक २१५ २५ खाड खंड रखलें २१६ १३ शिवर्लिंगकी शिवलिंग की १८० १३ प्रत्यङ्ग प्रत्यङ्ग तु २१७ ३५ सचारणा सवरणा १९२ २५ तिलक तिलरु २१६ २६ देध देव १९५ ४ दिपद द्विपद ,, २३ व्यबका काम व्यय का नाम ――――

8403 अनुवाद के सहायक ग्रंथ ग्रन्थ कर्त्ता १ अपराजितपृच्छा ... भुवनदेवाचार्य २ क्षीरार्णव .. विश्वकर्मा ३ ज्ञानप्रकाश दीपार्णव ... " ४ राजवल्लभ मंडन ... मंडन सूत्रधार ५ देवता मूर्त्ति प्रकरण .... " ६ रूपमंडन .... " ७ समरांगण सूत्रधार .... महाराजा भोजदेव ८ वास्तुसार .... ठक्कुर फेरु ९ मयमतम् .... मय सूत्रधार १० शिल्प रत्नम् भाग १-२ .... कुमार मुनि ११ विश्वकर्म प्रकाश .. विश्वकर्मा १२ काश्यप शिल्पम् .. महर्षि काश्यप १३ शिल्प दीपक .. गंगाधर १४ परिमाण मंजरी .. मल्ल सूत्रधार १५ जिन संहिता .. एक संधि भट्टारक १६ बृहत्संहिता .. वराह मिहिर १७ विवेक विलास . जिन दत्त सूरि १८ बृहच्छिल्पशास्त्र .... जगन्नाथ अंवाराम सोमपुरा १९ प्रासाद मंडन भाग १ .... अंवाराम विश्वनाथ सोमपुरा २० शिल्प रत्नाकर .... नर्मदाशंकर सोमपुरा २१ मानसार शिल्पशास्त्र .... मान सार ऋषि २२ विश्वकर्म वास्तु शास्त्र .... विश्वकर्मा २३ मुहूर्त्त चिन्तामणि ... श्री रामदेवज्ञ २४ आरंभसिद्धि वार्तिक .... उदयप्रभ देवसूरि २५ प्रतिष्ठासार .... वसुनंदी

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