भारतकोश
प्रश्नोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

प्रश्नोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Prashna Upanishad Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

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२०प्रश्नोपनिषद्[ प्रश्न १
अन्नं वै प्रजापतिः। कथम् ? ततस्तस्माद्ध वै रेतो नृबीजं तत्प्रजाकारणं तत्साद्योषित्ति सिक्तादिमा मनुष्यादिलक्षणाः प्रजाः प्रजायन्ते ।अन्न ही प्रजापति हैं । किस प्रकार ? [ सो बतलाते हैं—] उस अन्नसे ही प्रजाका कारणरूप रेत—पुरुषका वीर्य उत्पन्न होता है; और स्त्रीकी योनिमें सींचे गये उस वीर्यसे ही यह मनुष्यादिरूप प्रजा उत्पन्न होती है ।
यत्पृष्टं कुतो ह वै प्रजाः प्रजायन्त इति । तदेवं चन्द्रादित्यमिथुनादिक्रमेणाहोरात्रान्तेनान्नासृग्रेतोद्वारेणेमाः प्रजाः प्रजायन्त इति निर्णीतम् ॥ १४ ॥हे कबन्धिन् ! तूने जो पूछा था कि यह सम्पूर्ण प्रजा कहाँसे उत्पन्न होती है ? सो चन्द्रमा और आदित्यरूप मिथुनसे लेकर अहोरात्रपर्यन्त क्रमसे अन्न, रक्त एवं वीर्यके द्वारा ही यह सारी प्रजा उत्पन्न होती है—ऐसा निर्णय हुआ ॥ १४ ॥

प्रजापतिव्रतका फल

तद्ये ह वै तत्प्रजापतिव्रतं चरन्ति ते मिथुनमुत्पादयन्ते । तेषामेवैष ब्रह्मलोको येषां तपो ब्रह्मचर्यं येषु सत्यं प्रतिष्ठितम् ॥ १५ ॥

इस प्रकार जो भी उस प्रजापतिव्रतका आचरण करते हैं वे [ कन्या-पुत्ररूप ] मिथुनको उत्पन्न करते हैं । जिनमें कि तप और ब्रह्मचर्य है तथा जिनमें सत्य स्थित है उन्हींको यह ब्रह्मलोक प्राप्त होता है ॥ १५ ॥

तत्तत्रैवं सति ये गृहस्थाः— <br> 'ह वै' इति प्रसिद्धस्मरणार्थौऐसी स्थिति होनेके कारण जो गृहस्थ उस प्रजापतिव्रत—प्रजापतिके व्रतका आचरण करते हैं, यानी