प्रश्नोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

प्रश्नोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Prashna Upanishad Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
DevanagariHindipublished131 पृष्ठ
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| ४८ | प्रश्नोपनिषद् | [ प्रश्न ३ |
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| अध्यात्मं चैव चक्षुराद्याकारेण अवस्थानं विज्ञायैवं प्राणममृतम् अश्नुत इति विज्ञायामृतमश्नुत इति द्विर्वचनं प्रश्नार्थपरिसमाप्त्यर्थम् ॥ १२ ॥ | रूपसे बाह्य और चक्षु आदिरूपसे आन्तरिक स्थिति—इस प्रकार प्राणको जानकर मनुष्य अमरत्व प्राप्त कर लेता है। यहाँ 'विज्ञायामृतमश्नुते' इस पदकी द्विरुक्ति प्रश्नार्थकी समाप्ति सूचित करनेके लिये है ॥ १२ ॥ |
इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यश्रीमद्गोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्य- श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रश्नोपनिषद्भाष्ये तृतीयः प्रश्नः ॥ ३ ॥