प्रश्नोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Prashna Upanishad Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंषष्ठ प्रश्न
सुकेशाका प्रश्न—सोलह कलाओंवाला पुरुष कौन है ?
अथ हैनँ सुकेशा भारद्वाजः पप्रच्छ । भगवन्हिर- ण्यनाभः कौसल्यो राजपुत्रो मामुपेत्यैतं प्रश्नमपृच्छत । षोडशकलं भारद्वाज पुरुषं वेत्थ तमहं कुमारमब्रुवं नाहमिमं वेद यद्यहमिममवेदिषं कथं ते नावक्ष्यमिति समूलो वा एष परिशुष्यति योऽनृतमभिवदति तस्मान्ना- र्हाम्यनृतं वक्तुं स तूष्णीं रथमारुह्य प्रवव्राज । तं त्वा पृच्छामि क्वासौ पुरुष इति ॥ १ ॥
तदनन्तर उन पिप्पलादाचार्यसे भरद्वाजके पुत्र सुकेशाने पूछा— "भगवन् ! कोसलदेशके राजकुमार हिरण्यनाभने मेरे पास आकर यह प्रश्न पूछा था—'भारद्वाज ! क्या तू सोलह कलाओंवाले पुरुषको जानता है ?' तब मैंने उस कुमारसे कहा—'मैं इसे नहीं जानता; यदि मैं इसे जानता होता तो तुझे क्यों न बतलाता ? जो पुरुष मिथ्याभाषण करता है वह सब ओरसे मूलसहित सूख जाता है; अतः मैं मिथ्याभाषण नहीं कर सकता।' तब वह चुपचाप रथपर चढ़कर चला गया । सो अब मैं आपसे उसके विषयमें पूछता हूँ कि वह पुरुष कहाँ है ?" ॥ १ ॥
| अथ हैनँ सुकेशा भारद्वाजः पप्रच्छ । समस्तं जगत्कार्यकरणलक्षणं सह विज्ञानात्मना परस्मिन्नक्षरे सुषुप्तिकाले संप्र- | तदनन्तर उन पिप्पलादाचार्यसे भरद्वाजके पुत्र सुकेशाने पूछा । पहले यह कहा जा चुका है कि सुषुप्तिकालमें विज्ञानात्माके सहित सम्पूर्ण कार्यकारणरूप जगत् अक्षर (अविनाशी) परम पुरुषमें लीन |
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