भारतकोश
प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary

महाकवि भास द्वारा

DevanagariHindipublished178 पृष्ठ

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( 113 ) जिस प्रकार गोपाल के बिना गाएँ सुरक्षा के अभाव में नष्ट हो जाती है, उसी प्रकार राजा के बिना भी प्रजाएँ निश्चित ही विनाश को प्राप्त करती हैं। (२३) [भरत]—प्रजा मेरे पीछे-पीछे आए। [सुमं]त्र—राज्याभिषेक को छोड़ कर आप कहाँ जायेगे ? [भर]त—अभिषेक ? अभिषेक तो इन देवी को दीजिए। [सुमं]त्र—आप कहाँ जायेगे ? [भर]त—जहाँ वे लक्ष्मण के प्रिय राम है, मै वही पर जाऊँगा। अयोध्या उनके बिना अयोध्या नही है। वही अयोध्या है, जहाँ राम है। (२४) (सब निकल जाते है) तीसरा अंक समाप्त।