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प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary

महाकवि भास द्वारा

DevanagariHindipublished178 पृष्ठ

पृष्ठ 122, कुल 178 में से

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पृष्ठ 122

( 131 ) । नीचपथे = राज्य स्वीकृति के रूप मे पिता की आज्ञा न मानने वाले मार्ग र। प्रवर्तते = चल रहे हो। मात्राभिहित = माता के द्वारा कहा गया है। र्णे = घाव पर। प्रहर्तुम् = चोट पहुंचाना। सुगुण = हे अच्छे गुणों वाले। सूतिः = उत्पत्ति। निभृतधीमान् = अचंचल बुद्धि वाले ' सुपुरुष = हे अच्छे नपुरुप। मातृदोषः = जननी के द्वारा कियों गया अपराध। वरद = हे चाही ई वस्तु को देने वाले। आर्तम् = पीड़ित। यथावत् = सही रूप में। अन्वय-य पूर्वम् सासुराणाम् सुराणाम् विमर्दे अभिसरिसमये श्वसैन्यं समानैः विमानैः खम् गत्वा स स इति बहुशः विख्यातः। स श्रीमान् त्यक्तदेहः नरेन्द्रः दयितम् अपि स्नेहवन्तम् भवन्तम् विना स्वर्गस्थः साम्प्रतम पितृभिः सह नरेन्द्रैः रमयति किम् । (१७) अन्वय नरपतिनिधनम् भवत्प्रवासम् भरतविषादम् कुलस्य अनाथ- ताम् बहुविधम् दुष्प्रसह्यम् अनुभूय मे आयुषा गुणे बहु अपराध्दम् इव। (१८) अन्वय-इह देहेन स्थास्यामि, तत्र कर्मणा स्थास्यामि। भवतः नाम्ना एव राज्य कृतरक्षं भविष्यति। (१६) अन्वय-वत्स, अहम् पितुः नियोगात् वनम् आगतः। दर्पात् न, भयात् न, विभ्रमात् न। न कुलम् च सत्यधनम्, ते ब्रवीमि, भवान् नीचपथे कथम् प्रवर्तते। (२०) अन्वय-सुगुण, त्वत् प्रसूतिः मम अपि प्रसूतिः। स खलु निभृत- धीमान् ते पिता मे पिता च। सुपुरुष, पुरुषाणाम् मातृदोषः न दोषः। वरद, तावत् आर्तम् भरतम् यथावत् पश्य। (२१) हिन्दी अर्थ सुमन्त्र-(पास जाकर) आप दीर्घायु की जय हो। राम-हा तात, आपके साथ जो राजा दशरथ पहले देवासुर संग्रामो मे देवो की सहा- यता के लिए स्वर्ग जाते थे। उस यात्रा मे आपके विमान देव विमानों के समान होते थे। उस युद्ध में महाराज की विजय पर लोग आदर सम्मान प्रकट करते थे। वे ही राजा दशरथ अब मृत्यु के बाद आप

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