भारतकोश
प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary

महाकवि भास द्वारा

DevanagariHindipublished178 पृष्ठ

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पृष्ठ 129

*( 138 ) हम् = क्या (खेद व आश्चर्य सूचक अव्यय, जो स्त्री पात्रो द्वारा प्रयुक्त किया जाता है) । आशावन्तः = राम के आने की आस लगाए हुए। पुरे = अयोध्या नगर मे । पौराः = नागरिक । स्थास्यन्ति = विद्यमान होगे । त्वद्दिदृक्षया = आपके देखने की इच्छा मे । प्रीतिम् अनुराग को । करिष्यामि = करूँ गा । प्रमादस्य = कृपा अर्थात् चरण पादुकाएँ । प्रयतिष्ये = प्रयत्न करूँ गा । आरो- हतः = दोनो चढ़ते हैं । अनुयातृ = पीछे चलने वाले । अन्वय-मया सुचिरेण अपि कालेन किञ्चित् यश. अर्जितम् । अद्य भरतेन अचिरेण एव कालेन सञ्चितम् । (२६) अन्वय-अहम स्वजनस्य श्रद्देयः, पौररुचितः, लोकस्य दृष्टिक्षमः, स्वगंस्थस्य नराधिपस्य दयितः शीलान्वित. सुतः, गुणशालिनां भ्रातृणां बहुमतः, कीर्तेः महत् भाजनम्, गुणवता संवादेपु कथाश्रय., नब्धप्रियाणा प्रियः जातः । (२७) अन्वय -- पुरे पौराः आशावन्त. त्वद्दिदृक्षया स्थास्यन्ति । त्वत्प्रसा- दस्य दर्शनात् तेषा प्रीति करिष्यामि । (२८) हिन्दी अर्थ राम- (स्वगत) अहा, मैंने बहुत दिनों में जितना यश संचित किया था, भरत ने उतना यश अल्प काल में ही अर्जित कर लिया है । (२६) सीता-आर्यपुत्र, क्या भरत को आप प्रथम बार मांगी गई वस्तु नहीं देंगे । राम-अवश्य । कुमार, यह लो । भरत-बड़ी कृपा । (लेकर) आर्य, इन पर राज्याभिषेक के जल को छिटकना चाहता हूं । राम-तात, जो भरत को प्रिय हो, वह सभी किया जाए । सुमन्त्र-जैसी आपकी आज्ञा । भरत-(मन में) अहा, अब मैं अपने बान्धवों का विश्वास पात्र बना । नगरवासियों का प्रेम पात्र, संसार की ओर आंख उठा कर देखने योग्य, स्वर्गवासी महाराज दशरथ का प्रिय एवं अच्छे गुण वाला पुत्र, गुणी भाइयों का सम्मानी,