भारतकोश
प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary

महाकवि भास द्वारा

DevanagariHindipublished178 पृष्ठ

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प्रतिमा-नाटकम् नाटक का नामकरण प्रतिमा नाटक भास का एक महत्वपूर्ण नाटक है । रामायण की कथावस्तु वाले इस रूपक मे प्रतिमा गृह अथवा मूर्ति गृह की घटना का महत्व ही इस नाटक की इतिवृत्त रचना की प्रमुख विशेषता है । इस प्रकार इसका नाम तीसरे अंक के 'प्रतिमा गृह' की घटना के आधार पर रखा गया है । प्राचीन काल मे राजाओ के देवकुल होते थे, जिनमे मृत्यु के बाद राजाओ की पत्थर की मूर्तिया स्थापित की जाती थी । इक्ष्वाकु वंश का भी ऐसा ही देवकुल था, जिसमे मृत नरेशो की मूर्तिया स्थापित की गई थी । ननिहाल से लौटने समय देवकुल मे स्थापित दशरथ की प्रतिमा को देख कर ही भरत ने उनकी मृत्यु का अनुमान अपने आप कर लिया था । इसी कारण से इसका नाम "प्रतिमा नाटक" पड़ा । प्रो० ध्रुव के अनुसार इस नाटक का पूरा नाम 'प्रतिमा दशरथ' रहा होगा, जिसे संक्षिप्त रूप मे 'प्रतिमा' कर दिया गया । भास के एक अन्य नाटक 'प्रतिज्ञा यौगन्धरायण' को संक्षेप मे 'प्रतिज्ञा नाटक' तथा 'स्वप्नवासवदत्तम्' को 'स्वप्न नाटक' भी कहा जाता [