भारतकोश
प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary

महाकवि भास द्वारा

DevanagariHindipublished178 पृष्ठ

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(४३) श्री खरतरगच्छीय ज्ञान मन्दिर, जयपुर शब्दार्थ—अवदातिका=सीता की सखी का नाम । वल्कलम्=वृक्ष की त्वचा का बना वस्त्र । अत्याहितम् = अति + अहितम् = बहुत बुरा । उपन- यन्त्या = लाने वाली । हरतः = चुराने वाले का । सपरिवारा = सेविका के साथ । हञ्जे = अरी (यह स्त्री पात्र द्वारा सेविका आदि के लिए कहा जाने वाला सम्बोधन है ) । परिशङ्कितवर्णा=मानसिक आशंका से व्याकुल आकार वाली । इव = समान । परिजन = सेवक । वामहस्तपरिगृहीतम् = बाएं हाथ मे लिए हुए । नेपथ्यपालिनी = ग्रीन रूम की रक्षा करने वाली । रेवा = रक्षिका का नाम । निवृत्तरंगप्रयोजनम्=अभिनय का उपयोग समाप्त हो जाने वाले । किसलयम् = कोमल पत्ते को । निर्यात्य = वापस लौटा दो । तनूरु- हाणि = शरीर के रोंए । आदर्शम् = कांच को । आर्यवालाकिः = कञ्चुकी का नाम । प्रियाख्यानिकम् = खुशखबरी । प्रतीष्य = मन में रख कर (उपलब्ध्य) । उत्संगम् = गोद या झोली । अवमुच्य = उतार कर । पटहशब्दः = नगाडो की ध्वनि । एकपदे = शीघ्र । अवघट्टिततूष्णीकः=बजते बजते बन्द होना । उद्घात' = विघ्न । बहुवृत्तान्तानि = अनेक प्रकार के कथन वाले । मुखोदकम्= मुंह के आंसू धोने का जल । हिन्दी अर्थ (इसके बाद अवदातिका वल्कल वस्त्र लिए हुए आती है ) अवदातिका—ओह, बडा बुरा हुआ । विनोद मे भी इस वल्कल वस्त्र को उठा लाने से जब मै इतनी डर गई हूं, तो लोभ से दूसरो के धन को हरने वालो की क्या दशा होती होगी । हंसने की इच्छा सी हो रही है । किन्तु अकेली को नही हंसना चाहिए । (इसके बाद सीता सेविका के साथ आती है) सीता—अरी सखी, अवदातिका कुछ डरी हुई सी दीख रही है । यह क्या बात है ? चेटी—महारानी, सेवको से कुछ न कुछ अपराध हो ही जाता है । इससे भी कोई अपराध हो गया होगा । सीता—नही, नही । वह तो हसना भी चाहती है । अवदातिका—(पास जाकर) महारानी की जय हो । महारानी, मैने कुछ अपराध नहीं किया है । सीता—तुम से कौन पूछ रहा है ? अरी अवदातिका, यह तुम्हारे वायें हाथ मे क्या है ?