प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)
Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary
महाकवि भास द्वारा
पृष्ठ 50, कुल 178 में से
संदर्भ में पढ़ें( 47 )
शब्दार्थ-लङ्घिते = आरूढ होने पर । स्कन्धोच्चारण = कंधो तक ऊंचा उठा कर । नम्यमानवदन = घड़ो के मुख को झुका कर । प्रच्योतितोये = जल को गिराने पर । विसर्जिते = विदा करने पर । विस्मितः = आश्चर्यचकित । विस्मयः-आश्चर्य । अपनीतभारोच्छ्वसितम् = बोझ के उतर जाने से हल्का । दिष्ट्या = सौभाग्य से (यह शब्द अव्यय है) । मैथिलीम् = सीता को । आस्यते = बैठी हुई हो । अलीक = मिथ्या । दारिका = लडकी । अवगच्छामि = समझता हूं । कौतूहलम् = उत्सुकता को । प्रकृतिजन = प्रजा के प्रमुख लोग । बाल्या- भ्यस्त = शैशव से परिचित । अङ्कम् आरोप्य = गोद मे बैठा कर । मातृ- गोत्र = माता के नाम से अर्थात् कौसल्यानन्दन कह कर । स्निग्धं = प्रेमपूर्वक । आभाष्य = बोलकर । प्रतिगृह्यताम् = स्वीकार करो । तदानीम् = तब । आर्य- पुत्रेण = पतिदेव के द्वारा । तर्कयसि = अनुमान करती हो । अभणित्वा = नही बोल कर । पादमूलयोः = दोनो पात्नो पर । सुष्ठु = ठीक । तुल्यशीलानि = समान स्वभाव वाले । द्वन्द्वानि = स्त्री-पुरुषो के युगल । सृज्यन्ते = बनाए जाते हैं । समम् = एक साथ । वाष्पेण = आसुओ से । क्लेदितौ = गीले हो गए । अन्वय-पटहे आरब्धे, गुरुजने स्थिते भद्रासने लङ्घिते, घटे स्कन्धो- च्चारणनम्यमानवदनप्रच्योतितोये, राज्ञा आहूय, विसर्जिते मयि, जनः मे धैर्येण विस्मय । भो., यदि स्वः पुत्र. पितुः वचः कुरुते, तत्र कः विस्मय. । (५) अन्वय-समम्, तस्य बाष्पेण ममोपरि पतता, मम अधः पतता, मम शिरः क्लेदितम्, मे पितुः पादौ क्लेदितौ च । (६) हिन्दी अर्थ (राम का प्रवेश) राम-ओह, बाजे बजने लगे थे । गुरुजन वहाँ पर उपस्थित थे । मै सिहासन पर समासीन था । तीर्थों के जल से भरे हुए मगल कलशो को उठाकर मेरा अभिषेक किया जा रहा था । इतना हो जाने पर भी महाराजा ने मुझे बुलाकर बिदा कर दिया । इस स्थिति मे मेरी दृढ़ता पर लोग आश्चर्य मे हो गए । किन्तु अपना पुत्र यदि पिता की आज्ञा को पालता है, तो इसमे आश्चर्य की क्या बात है ? (५) "पुत्र, इस समय राज्याभिषेक को रहने दो" इस प्रकार स्वयं महाराजा से बिदा प्राप्त कर, अपने भार का उतरा समझ कर मेरा मन छुटकारे