भारतकोश
प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary

महाकवि भास द्वारा

DevanagariHindipublished178 पृष्ठ

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पृष्ठ 88

पुरोगैः - कौसल्या जिनके आगे चल रही है, ऐसी । अन्तःपुरैः = रानियों के द्वारा । आगन्तव्यम् = आना चाहिये । अपनीत = हटाना । कपोतसन्द्वानकं = कबूतरो के घोसलो को । गर्भगृह = मध्यगृह अर्थात् बीच का भवन । सौध- [पार्श्व टिप्पणी: पदविज्ञात-] वर्णकदत्त = सुधामय (सफेद) रग से पोतना । चन्दनापञ्चाङ्गुला = चन्दन से [पार्श्व टिप्पणी: ज इति।] पाँचो अंगुलियो के निशान बनाना । भित्तयः = दीवारे । अवसक्त = संयोजित करना या लगाना । माल्यदामशोभीनि = फूलों की मालाओ से सुशोभित । प्रकीर्णाः = बिखेरी गई । बालुकाः = रेत । विश्वस्तः = पीटने के भय से रहित । प्रवेशकः = यह भी विष्कम्भक के समान ही आगे आने वाली घटनाओ के सक्षिप्त अर्थ का सूचक है । सावेगम् = पीड़ा के साथ । मातुलपरिचयात् = मामा युधाजित के पास रहने के कारण । अविज्ञातवृत्तान्तः = समाचारो को न जानने वाला । अस्मि = हूं । दृढम् = नितान्त । अकल्यशरीरः = रोगग्रस्त शरीर वाले । व्याधिः = रोग । हृदयपरितापः = आधि या मानसिक पीडा । आहुः = कहा है । भिषजः = वैद्य । भुङ्क्ते = खाते है । निरशनः = निराहार रहने वाले । दैवम् = कुछ भी नही कहा जा सकता है । स्फुरति = फड़क रहा है । वाहय = चलाओ । अन्वय—मे पितुः कः व्याधिः, खलु महान् हृदयपरितापः । वैद्याः तम् किम् आहुः, खलु तत्र निपुणाः भिषज. न । किम् आहारम् भुङ्क्ते शयनम् अपि (अनुभवति) । भूमौ निरशनः । किम् आशा स्यात् । दैवम् । हृदयम् स्फुरति, रथम् वाहय । (१) हिन्दी अर्थ (इसके बाद सुधाकार का प्रवेश) सुधाकार—(झाडू लगा कर) अच्छा, इस समय आर्य संभावक द्वारा बताए गए सभी कार्य तो कर लिए । अब थोड़ी देर तक सो लूँ । (सोता है) (प्रवेश करके) भट—(चेट के पास जाकर और पीट कर) अरे दासी-पुत्र, अब काम क्यों नहीं करता ? (पीटता है) सुधाकार—(जाग कर) मार लो, मुझे मार लो । भट—मारने पर तुम क्या करोगे ?