भारतकोश
प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary

महाकवि भास द्वारा

DevanagariHindipublished178 पृष्ठ

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पृष्ठ 89

( 86 ) (निष्क्रान्तौ) (प्रवेशकः) (ततः प्रविशति भरतो रथेन सूतश्च) भरतः- (सावेगम्) सूत ! चिरं मातुलपरिचयादविज्ञातवृत्तान्तो ऽस्मि । श्रुतं मया दृढमकल्यशरीरो महाराज इति । तदुच्यताम्— पितुर्मे को व्याधिः सूतः--हृदयपरितापः खलु महान् भरतः--किमाहुस्त वैद्या' सूतः--न खलु भिषजस्तत्र निपुणाः । भरतः--किमाहारं भुङ्क्ते शयनमपि सूतः--भूमौ निरशनः भरतः-किमाशा स्याद सूतः--दैव भरत.---स्फुरति हृदयं वाहय रथम् ॥ (१) सूतः-यदाज्ञापयत्यायुष्मान् । (रथं वाहयति) शब्दार्थ—सुधाकार˙ = चूने की कलई आदि से सफेदी करने वाला सम्मार्जनादीनि = स्वच्छता आदि । कृत्वा = करके अर्थात् झाडू लगाकर भवतु = ठीक है । कृतम् = कर लिया है । आर्यसम्भपकस्य = पूज्य सम्भप- का (यह काञ्चुकीय का नाम है) । आज्ञप्तम् = आदेश दिया गया । मुहूर्तम् = थोडे समय के लिए । स्वप्स्यामि = सोऊँगा । भट˙ = सिपाही । चेटम् उपगम्य = सेवक के पास जाकर । ताडयित्वा = पीट कर । अंघो = अरे । दास्या पुत्र = दासी के लड़के (यह सभ्य समाज की गाली है, किसी को "दासी का पुत्र' कहना उसे गाली देना है, क्योकि इससे उसकी माँ का अपमान झलकता है) मृते = मरने पर । मोक्ष्यामि - छोड़ू गा । शक्यम् - समर्थ हूँ । भर्त˙ - स्वामि । अपराधे - दोष । सन्दिष्ट. - आज्ञा दिए गए हो । भर्तृदारकस्य = राजकुमार । विभ्रष्ट = हटना । कृत ~ होने वाले । प्रतिमागेह = मृत राजाओं की स्मृति मे जहाँ उनकी प्रतिमाएँ लगाई जाती हैं, उस स्थान को । कौसल्य.