भारतकोश
प्रत्यभिज्ञाहृदयम् (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैवदर्शन एवं जयदेव सिंह सान्वय हिन्दी भाष्य)

प्रत्यभिज्ञाहृदयम् (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैवदर्शन एवं जयदेव सिंह सान्वय हिन्दी भाष्य)

Pratyabhijnahridayam of Acharya Kshemaraja with Hindi Commentary

आचार्य क्षेमराज द्वारा

DevanagariHindipublished187 पृष्ठ

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पारिभाषिक शब्दों का कोश १५५ व्युत्थान शाब्दिक अर्थ उठना, योग का पारिभाषिक शब्द-'समाधि के बाद सामान्य चेतनावस्था में आ जाना।' श शक्ति शिव का अन्तर्बल जिसके द्वारा वह पंचकृत्य करता है। शक्तिपात किसी शिष्य या साधक पर शक्ति का गिराव, अनुग्रह। शक्तिप्रसर शक्तिविकास, समाधि से साधारण दशा में आने पर भी समाधि के अनुभव को बनाये रखना। शक्तिविकास इन्द्रियों के विषयों की ओर खुले रखने पर भी आन्तरिक सत्य पर एकाग्रता को बनाये रखना। शक्तिविश्रान्ति समाधि में निमज्जित होना और उस दशा में टिके रहना। शक्तिसंकोच इन्द्रिय व्यापार से चित्त को हटाकर आन्तरिक सत्य की ओर मोड़ना। शब्दब्रह्म चरमसत् जिसका स्वरूप स्पन्दन है जिसमें पद और अर्थ एक हैं और जिसका मानवीय शब्द स्थूल प्रतिरूप है (दे० टि० ७२-७१)। शासन शास्त्र शिव सत्, परमार्थ, भद्र शिवतत्त्व ३६ तत्त्वों में का आदितत्त्व जिसका लक्षण है चित् स्वरूप। शुद्धविद्या शिव से गिनने पर पाँचवा तत्त्व जिसका परा- मर्श है 'इदं च अहं च'। दे० टि० १८ में ३६ तत्त्व। शुद्धाध्व अतिजागतिक सत्ता, प्रथम पाँच तत्त्वों की अभिव्यक्ति। शून्य रिक्त, वह अवस्था जिसमें किसी पदार्थ का अनुभव नहीं होता। शून्यप्रमाता केवल शून्य अर्थात् रिक्त का अनुभव करने वाला, प्रलयांकल।